
नई दिल्ली: नए साल की शुरुआत में ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने लोगों के भरोसे को चुनौती दे दी है। अमेरिका की वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई फेक फोटो और वीडियो वायरल हुए, जो AI द्वारा बनाए गए प्रतीत होते हैं। इनमें एक वीडियो और फोटो शामिल थे, जिसमें एक ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) अधिकारी द्वारा महिला को गोली मारने का दृश्य दिखाया गया था।
AI ने क्या किया?
AI तकनीक के कारण अब सच और झूठ के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कई फोटोज और वीडियो पुराने असली फुटेज के साथ एडिट की गई थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद सोशल मीडिया पर AI जनरेटेड कंटेंट तेजी से फैल गया।
हाल ही में, ट्रंप ने अपने वेरिफाइड सोशल अकाउंट पर वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की फोटो शेयर की, जिसमें वे हथकड़ी और आंखों पर पट्टी के साथ एक नौसैनिक जहाज पर दिखाए गए थे। इसके तुरंत बाद मादुरो की गिरफ्तारी से जुड़ी कई अनवेरिफाइड और AI-एडिटेड फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।
एलन मस्क भी हुए शामिल
X (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने भी एक ऐसा वीडियो शेयर किया, जिसमें वेनेजुएला के लोग मादुरो की गिरफ्तारी के लिए अमेरिका को धन्यवाद देते हुए दिखाई दे रहे थे। यह वीडियो भी AI जनरेटेड प्रतीत होता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
NBC News की रिपोर्ट के अनुसार, स्टैनफोर्ड सोशल मीडिया लैब के फाउंडिंग डायरेक्टर जेफ हैनकॉक का कहना है कि AI की तेजी से बढ़ती क्षमताओं के कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा कमजोर हो रहा है। लोग अब डिजिटल माध्यमों पर दिखाई गई चीजों पर सच मानने से पहले दो बार सोचेंगे।
AI से पहले भी होती थी हेरफेरी
AI से पहले भी फोटोशॉप और एनालॉग इमेज मैनिपुलेशन तकनीक के जरिए जानकारी में हेरफेरी की जाती थी। 2016 के अमेरिकी चुनाव और 1400 के दशक में प्रिंटिंग प्रेस के बाद प्रचार सामग्री में गलत जानकारी का प्रसार इसके उदाहरण हैं। लेकिन AI ने असली और नकली के बीच की पहचान को और भी मुश्किल बना दिया है, जिससे भविष्य में डिजिटल भरोसे की चुनौती और बड़ी हो सकती है।