
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने चाइनीज मांझे को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा इस घातक डोर से पतंग उड़ाता पाया जाता है, तो उसके अभिभावक कानूनन जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं। वहीं, चीनी मांझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (1) के तहत लापरवाहीपूर्ण कृत्य के कारण होने वाली मृत्यु के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
कोर्ट ने स्वयं लिया था संज्ञान
इंदौर उच्च न्यायालय ने चीनी मांझे के कारण हुए हादसों और लोगों की मौतों को 11 दिसंबर, 2025 को जनहित याचिका के रूप में खुद संज्ञान में लिया था। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आम जनता को इस घातक मांझे के उपयोग और बिक्री के खतरों के प्रति जागरूक किया जाए।
राज्य सरकार की कार्रवाई और अभियान
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि चीनी मांझे की बिक्री रोकने के लिए कई कदम उठाए जा चुके हैं और पतंगबाजी से जुड़े हादसों को रोकने के लिए सावधानीपूर्ण उपाय किए जा रहे हैं। मीडिया माध्यमों—प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक—के जरिए प्रचार अभियान चलाकर जनता को इस धागे के खतरों से अवगत कराया जाएगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रचार अभियान में यह भी उल्लेख हो कि अगर कोई व्यक्ति या नाबालिग इसका उपयोग करता पाया जाता है, तो जिम्मेदार पर गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
मांझे से मौतों का मामला
अधिकारियों के अनुसार, पिछले डेढ़ महीने में इंदौर में चीनी मांझे से हुए हादसों में 16 वर्षीय युवक और 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है। नायलॉन से बना चीनी मांझा अत्यंत तीखा और जानलेवा होता है। बावजूद इसके, पतंगबाज इसे प्रतिस्पर्धा में अपने प्रतिद्वंद्वियों की पतंग काटने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
अदालत का संदेश स्पष्ट
हाईकोर्ट ने न केवल अभिभावकों को जिम्मेदार ठहराने का निर्देश दिया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रशासन और राज्य सरकार इस प्रतिबंध को पूरी सख्ती से लागू करें। इंदौर के जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने अदालत को बताया कि निर्देशों का पालन करते हुए जल्द ही आवश्यक आदेश जारी किए जाएंगे और इसे पड़ोसी जिलों में भी तुरंत लागू किया जाएगा।