
नई दिल्ली। विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में बारिश ने खेल का रुख बदल दिया। बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खेले गए दोनों अहम मैच—कर्नाटक बनाम मुंबई और सौराष्ट्र बनाम उत्तर प्रदेश—बारिश से प्रभावित रहे, जिसके चलते मुकाबलों का फैसला VJD मेथड के आधार पर किया गया। इसी नियम के तहत कर्नाटक और सौराष्ट्र ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की।
बारिश के कारण खेल बाधित होने के बाद कर्नाटक को मुंबई के खिलाफ 55 रन से विजेता घोषित किया गया, जबकि सौराष्ट्र ने उत्तर प्रदेश को 17 रन से हराया। इन नतीजों के बाद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच VJD मेथड को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है VJD मेथड?
VJD मेथड (वी जयदेवन मेथड) एक गणितीय प्रणाली है, जिसका उपयोग बारिश या अन्य कारणों से प्रभावित लिमिटेड ओवर मुकाबलों में संशोधित लक्ष्य तय करने के लिए किया जाता है। इस पद्धति को केरल के सिविल इंजीनियर वी. जयदेवन ने विकसित किया था।
VJD मेथड को क्रिकेट में प्रचलित DLS (डकवर्थ–लुईस–स्टर्न) मेथड का विकल्प माना जाता है। यह खासतौर पर इस बात पर जोर देता है कि किसी टीम ने अपने ओवरों का किस चरण में कितना स्कोर किया और उसके पास कितने संसाधन (ओवर और विकेट) शेष थे।
इस मेथड का इस्तेमाल पहले इंडियन क्रिकेट लीग और तमिलनाडु प्रीमियर लीग में किया जा चुका है। इतना ही नहीं, आईपीएल के चौथे और पांचवें सत्र में इसे लागू करने पर विचार हुआ था, जबकि एक समय आईसीसी ने भी इसे DLS के विकल्प के रूप में देखने की संभावना टटोली थी।
क्वार्टर फाइनल में चमके पडिक्कल और हार्विक
कर्नाटक की जीत के नायक बने देवदत्त पडिक्कल, जिन्होंने 95 गेंदों में 11 चौकों की मदद से 81 रन की शानदार पारी खेली। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पूरे टूर्नामेंट में उनका बल्ला जमकर बोला है और उनके नाम 700 से अधिक रन दर्ज हो चुके हैं।
वहीं सौराष्ट्र की ओर से कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज हार्विक देसाई ने उत्तर प्रदेश के खिलाफ नाबाद शतक जड़ा। देसाई ने 116 गेंदों में 8 चौके और 2 छक्कों की मदद से 100 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
निष्कर्ष
बारिश ने जहां इन अहम मुकाबलों की लय तोड़ी, वहीं VJD मेथड ने निष्पक्ष तरीके से नतीजा निकालने में निर्णायक भूमिका निभाई। कर्नाटक और सौराष्ट्र की सेमीफाइनल में एंट्री के साथ अब यह साफ है कि आधुनिक क्रिकेट में गणितीय नियम भी उतने ही अहम हो चुके हैं जितना मैदान पर खेला जाने वाला खेल।