
राजधानी लखनऊ के जलकल विभाग और नगर निगम में कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। जलकल विभाग के जोन सात में एक कमर्शियल प्रॉपर्टी के पानी और सीवर बिल में घपला करके 25 लाख रुपये के बिल को महज 3.30 लाख रुपये कर दिया गया।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
जोन सात के कुछ कर्मचारियों ने कमर्शियल भवन की हाउस आईडी 10486049 के रिकॉर्ड में केवल सीवर का बिल दिखाया और पानी का बिल रिकॉर्ड से हटा दिया। इससे भवन स्वामी को 25 लाख रुपये का बिल केवल 3.30 लाख रुपये का दिखाया गया। जबकि भवन के आसपास पानी की पाइपलाइन पिछले 10 वर्षों से मौजूद है, फिर भी फर्जी रिपोर्ट लगाकर भवन स्वामी से केवल सीवर का ही भुगतान करवा लिया गया। जलकल विभाग के जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और भवन के आसपास पानी की कनेक्शन की पुष्टि करवाई जा रही है।
नगर निगम में हाउस टैक्स फर्जीवाड़ा
इसी प्रकार, लखनऊ नगर निगम के जोन सात में हाउस टैक्स कलेक्शन में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई। 31 दिसंबर 2025 को कुल हाउस टैक्स वसूली ₹40.58 लाख थी, लेकिन 8 जनवरी को ऑडिट में ऑनलाइन रिकॉर्ड में यह घटकर ₹29.74 लाख हो गया। यानी ₹10.84 लाख रिकॉर्ड से गायब हो गए।
चीफ टैक्स असेसमेंट अफसर विनय राय ने जोनल अफसर रामेश्वर प्रसाद से लिखित जवाब मांगा है। आरोप है कि जोनल अफसर ने लक्ष्य हासिल करने के लिए चेक लगाया और बाद में इसे रिकॉर्ड से हटा दिया।
जांच जारी
जलकल विभाग और नगर निगम दोनों ही मामलों में उच्चाधिकारियों ने जांच का आदेश दिया है। दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई और फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला साफ संदेश देता है कि सरकारी विभागों में लापरवाही और मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और भविष्य में ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।