
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की हार के बाद पार्टी में असंतोष और सवालों की खामोश फुहार महसूस की जा रही है। इसी कड़ी में राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पटना लौटने पर विधायकों की अनुपस्थिति को पार्टी के लिए ‘अशुभ लक्षण’ बताया है।
रविवार को सपरिवार छुट्टियां मनाकर पटना लौटे तेजस्वी यादव का हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह उस अंदाज में हुआ जिसे लेकर शिवानंद तिवारी ने पार्टी के भविष्य को चिंताजनक करार दिया। उनका कहना है कि हार के बाद नेतृत्व को जमीन पर सक्रिय होना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।
स्वागत में विधायक नदारद
शिवानंद तिवारी ने कहा कि हवाई अड्डे पर पार्टी के कोई भी विधायक उपस्थित नहीं थे। केवल मीडिया कैमरों की भीड़ ही वहां नजर आई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि तेजस्वी सीधे घर चले गए और पार्टी कार्यालय का दौरा करना आवश्यक नहीं समझा। उनके अनुसार, यह पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत नहीं हैं।
100 दिन में नई सरकार की समीक्षा का एलान
पटना पहुंचने पर तेजस्वी यादव ने सकारात्मक राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि वे नई सरकार को काम करने के लिए 100 दिनों का समय देंगे। उन्होंने एनडीए की ‘डबल इंजन’ सरकार पर निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार, पलायन और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए। साथ ही महिलाओं को दो-दो लाख रुपए देने के चुनावी वादों की याद दिलाई।
नेतृत्व क्षमता पर उठ रहे सवाल
शिवानंद तिवारी ने पहले भी तेजस्वी यादव के विदेश दौरे और रणनीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि तेजस्वी में अगले पांच साल तक विपक्ष की भूमिका निभाने की क्षमता नहीं दिख रही है। शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए सलाह दी कि तेजस्वी को ‘नेता’ बनने के बजाय ‘कार्यकर्ता’ बनकर लोगों से सीधे जुड़ना चाहिए, हार को सहजता से स्वीकार कर जमीन पर उतरना चाहिए।
निष्कर्षतः, हार के बाद RJD के भीतर सवाल उठ रहे हैं और वरिष्ठ नेताओं की चेतावनी यह संकेत देती है कि नेतृत्व को जमीन पर सक्रिय होना होगा, वरना पार्टी की संगठनात्मक स्थिति पर संकट गहराने की संभावना है।