
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। कोलकाता में चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (IPAC) के दफ्तर और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने आ गई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां इसे राजनीतिक साजिश बता रही हैं, वहीं बीजेपी ने उन पर जांच में दखल देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
‘जितने हमले कर लो, बंगाल फिर जीतेगा’ का नारा
चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए टीएमसी ने ‘जोतोई कोरो हमला, आबार जीतबे बांग्ला’ (जितने भी हमले कर लो, बंगाल फिर जीतेगा) का नारा दिया है। लेकिन आई-पैक पर ईडी की रेड ने इस अभियान को और आक्रामक बना दिया है। ममता बनर्जी खुद इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर आई हैं और केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रही हैं।
टीएमसी का आरोप: एजेंसियों के जरिए डराने की कोशिश
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी बंगाल में लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करने में असफल हो रही है, इसलिए ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का सहारा लिया जा रहा है। पार्टी ने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। दिल्ली में टीएमसी के आठ सांसदों ने संसद परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं सोशल मीडिया पर भी पार्टी ने आक्रामक अभियान छेड़ दिया है।
बीजेपी का पलटवार: ममता पर जांच में बाधा डालने का आरोप
दूसरी ओर, बीजेपी ने ईडी की कार्रवाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप को लेकर तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि
“देश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि ईडी की रेड के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री मौके पर पहुंचकर जांच में दखल दें और सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश करें।”
बीजेपी का दावा है कि हवाला और कोयला घोटाले से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में आई-पैक और प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसे ममता बनर्जी ने बंगाल पुलिस के साथ पहुंचकर बाधित किया।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सीबीआई जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आई-पैक और ईडी दोनों ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों पक्षों की याचिकाएं न्यायमूर्ति सुवरा घोष की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। वहीं ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।
सड़क पर उतरीं ममता, विपक्ष भी सक्रिय
ईडी रेड के विरोध में ममता बनर्जी एक बार फिर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। वह जाधवपुर में प्रस्तावित प्रदर्शन की अगुवाई करेंगी। उधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस घटनाक्रम को “गुंडागर्दी” करार दिया है। वाम दलों ने भी ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए अलग मोर्चा खोल दिया है।
बंगाल में बीजेपी की बढ़ती ताकत
बीते तीन विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी बंगाल में लगातार मजबूत हुई है—
2011: टीएमसी 184, बीजेपी 0
2016: टीएमसी 211, बीजेपी 6
2021: टीएमसी 215, बीजेपी 77
यही वजह है कि ईडी की कार्रवाई को लेकर सियासी लड़ाई अब चुनावी रणनीति का अहम हथियार बनती दिख रही है।
किसे पड़ेगा दांव उलटा?
एक ओर टीएमसी इसे ‘बंगाली अस्मिता बनाम दिल्ली की सत्ता’ की लड़ाई बनाकर जनता के बीच जा रही है, वहीं बीजेपी इसे भ्रष्टाचार बनाम ईमानदारी के मुद्दे के रूप में पेश कर रही है। ऐसे में सवाल यही है कि ईडी की यह कार्रवाई सहानुभूति बटोर कर ममता को मजबूत करेगी या भ्रष्टाचार के आरोपों से टीएमसी को नुकसान पहुंचेगा—इसका जवाब आने वाले चुनावी महीनों में बंगाल की जनता देगी।