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बिहार के 6 जिले सड़क हादसों के 100 प्रमुख स्थानों में शामिल, केंद्र और राज्य सरकार ने शुरू किया बड़ा ऑपरेशन

 

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पटना (बिहार), 9 जनवरी 2026: बिहार के छह जिले, जिनमें राजधानी पटना भी शामिल है, देश के उन 100 जिलों में शुमार हो गए हैं, जहां सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की योजना बनाई है।

 

सड़क सुरक्षा के लिए विशेष कार्य योजना

 

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राज्यों के परिवहन मंत्रियों की बैठक में बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों का विवरण साझा किया। केंद्र सरकार ने देशभर में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाली 100 स्थानों की पहचान की है। इनमें बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा शामिल हैं। इन जिलों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को शून्य करने के लिए ‘जीरो फैटेलिटी’ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

जन जागरूकता अभियान और सुधार की दिशा में कदम

 

इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए बिहार सरकार ने 1 से 31 जनवरी 2026 तक राज्य भर में सड़क सुरक्षा से संबंधित रैलियों, मैराथन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजना बनाई है। इसके अलावा, पिछले वर्ष 2025 में सड़क सुरक्षा पर कुल 484 बैठकें आयोजित की गईं, जिसमें डीएम और एसपी स्तर पर दुर्घटनाओं के कारणों की समीक्षा की गई।

 

साथ ही, ब्लैक स्पॉट्स (खतरनाक स्थानों) की संख्या में भी लगातार कमी आई है। एनएचएआई और पथ निर्माण विभाग ने इन स्थानों पर साइन बोर्ड, सड़क चौड़ीकरण और बैरिकेडिंग जैसे उपायों को तेज़ी से लागू किया है।

 

स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवा में सुधार

 

सड़क दुर्घटनाओं के बाद पीड़ितों को तुरंत मदद पहुंचाने के लिए एंबुलेंस व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। अब शहरी क्षेत्रों में 102 नंबर पर कॉल करने के 20 मिनट के भीतर और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंच रही है। इसके अलावा, 1500 सरकारी एंबुलेंस की मैपिंग पूरी हो चुकी है, और 2000 निजी एंबुलेंस को भी इस प्रणाली में जोड़ा जा रहा है।

 

मुआवजा और सहायता योजनाएं

 

सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद और चिकित्सा सहायता को और आसान बनाया है। हिट एंड रन मामलों में मृतकों को 2,00,000 रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, दुर्घटना के पहले 7 दिनों में पीड़ितों को 1,50,000 रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान किया जा रहा है।

 

साथ ही, ‘गुड सेमेरिटन’ (मददगार) को 25,000 रुपये का इनाम दिया जा रहा है, जो ‘गोल्डन ऑवर’ में दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की मदद करता है।

 

समाप्ति

 

सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे इन कदमों से उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार के सड़क हादसों की स्थिति में सुधार होगा और आने वाले समय में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में कमी आएगी।

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