
नई दिल्ली: देश में मेडिकल शिक्षा को और सुलभ बनाने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब नॉन-प्रॉफिट (Non-Profit) और प्रॉफिट (For-Profit) कंपनियां भी देश में मेडिकल इंस्टिट्यूशंस खोल सकती हैं। इसके साथ ही पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर भी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का रास्ता साफ कर दिया गया है।
एनएमसी चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ ने आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में डॉ एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले केवल सेक्शन 8 कंपनियों को ही मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति थी, लेकिन अब यह प्रतिबंध हटा दिया गया है।
विद्यार्थियों के लिए लाभ:
इस कदम से मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ेगी, पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा। नीट की तैयारी कर रहे और मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उपाय:
डॉ. सेठ ने बताया कि PPP मोड पर कॉलेजों के संचालन में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए NMC एक अलग एक्रेडिटेशन प्रॉसेस और SOP तैयार करेगा। उनका कहना है कि आयोग का लक्ष्य है कि मेडिकल शिक्षा आम लोगों के लिए सुलभ हो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित रहे।
क्लिनिकल रिसर्च और AI का समावेश:
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए NMC ने क्लिनिकल रिसर्च को मेडिकल पाठ्यक्रमों में अनिवार्य किया है। इसके अलावा, एमबीबीएस जैसे कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल हेल्थकेयर तकनीकें भी शामिल की जा रही हैं।
एनएमसी का यह कदम भारत में मेडिकल शिक्षा के विस्तार और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।