
वॉशिंगटन: अमेरिका में लॉ फर्म स्क्वॉयर पैटन बोग्स द्वारा FARA (Foreign Agents Registration Act) के तहत जारी दस्तावेज़ों से नया खुलासा हुआ है। इनमें यह स्पष्ट हुआ है कि पाकिस्तान ने 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कम से कम 100 बार अमेरिका में अपने अधिकारियों और लॉबी फर्मों के माध्यम से भारत से बचाने की गुहार लगाई।
अमेरिका में पाकिस्तानी लॉबी की हिम्मत: दस्तावेजों में दर्ज है कि पाकिस्तान के डिप्लोमैट्स और डिफेंस अधिकारी ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने बैठकों के जरिए अमेरिकी अधिकारियों और मीडिया से संपर्क करते रहे। इस दौरान उन्होंने भारत से युद्ध रोकने के लिए अमेरिकी मध्यस्थता की मांग की।
ट्रंप का दावा फेल: दस्तावेज़ों से यह भी साफ हुआ कि डोनाल्ड ट्रंप बार-बार मध्यस्थता का दावा करते रहे, लेकिन वास्तव में भारत नहीं, पाकिस्तान अमेरिका से मदद मांग रहा था।
पाकिस्तान ने अमेरिका को क्या प्रस्ताव दिए:
भारत से संघर्ष रुकवाने के बदले अमेरिका में निवेश बढ़ाने, स्पेशल एक्सेस और क्रिटिकल मिनरल्स की पेशकश।
साझा हितों पर अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का आश्वासन।
एनर्जी और एग्रीकल्चर क्षेत्र में अमेरिकी सामान की खरीद बढ़ाने की योजना।
आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में सहयोग का प्रदर्शन, जैसे ISIS बॉम्बर को गिरफ्तार कर अमेरिका को सौंपना।
दस्तावेज़ों में पाकिस्तान की वास्तविक चिंता:
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले की निष्पक्ष जांच की मांग।
भारत के साथ सीजफायर और आतंकवाद विरोधी सहयोग में अमेरिका की मध्यस्थता।
पाकिस्तानी तालिबान और अन्य आतंकी खतरों का सामना करना।
विश्लेषण: ये दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि भारत के हमलों की तीव्रता और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी सेना और नेतृत्व में खौफ था। पाकिस्तान अमेरिका से लगातार हस्तक्षेप की गुहार लगाता रहा ताकि भारत के हमले रुके, जबकि ट्रंप के ‘मध्यस्थता’ दावे झूठ साबित हुए।