Friday, January 9

क्या समय पर होंगे यूपी पंचायत चुनाव? आरक्षण प्रक्रिया बनी सबसे बड़ी बाधा, टलने के आसार

 

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर संशय की स्थिति गहराती जा रही है। नए साल की शुरुआत के बावजूद अब तक चुनाव से जुड़ी अहम प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो सकी हैं, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या पंचायत चुनाव अपने तय समय पर कराए जा सकेंगे या नहीं। जानकारों के अनुसार, चुनाव टलने की सबसे बड़ी वजह सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया का अधूरा रहना है।

 

दरअसल, पंचायत चुनाव के लिए अब तक सीटों का आरक्षण तय नहीं किया जा सका है। इसकी मुख्य वजह समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन न हो पाना माना जा रहा है। आयोग के बिना ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती, जिससे पूरे चुनाव कार्यक्रम पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

 

हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सूची भी जारी कर दी गई है। लेकिन सीटों का आरक्षण घोषित किए बिना चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

 

समर्पित ओबीसी आयोग बना रोड़ा

 

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर स्थिति इसलिए जटिल है, क्योंकि 2011 की जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या का अलग से आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तभी दिया जा सकता है, जब समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर सीटों का निर्धारण किया जाए। ऐसे में आयोग का गठन और उसकी रिपोर्ट चुनाव प्रक्रिया के लिए अनिवार्य हो गई है।

 

मंत्री का दावा, समय पर होंगे चुनाव

 

पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर दावा किया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अप्रैल–मई 2026 में तय समय पर ही कराए जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और तैयारियां लगातार की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायतीराज विभाग की ओर से छह सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, जिस पर जल्द निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

 

आरक्षण प्रक्रिया है संवैधानिक बाध्यता

 

पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर तय किया जाना है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अनुसूचित जातियों की आबादी 20.69 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों की आबादी 0.56 प्रतिशत है। नियमों के तहत इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण किया जाना अनिवार्य है। लेकिन ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग की रिपोर्ट के अभाव में प्रक्रिया अटकी हुई है।

 

चुनाव टलने की आशंका

 

प्रदेश में मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। यदि जल्द ही समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर उसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो पंचायत चुनाव के कार्यक्रम में बदलाव करना सरकार की मजबूरी बन सकता है। फिलहाल, चुनाव समय पर होंगे या टलेंगे—इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है और सभी की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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