Friday, January 9

ट्रंप के टैरिफ के बीच नितिन गडकरी की दो टूक: आयात घटे, निर्यात बढ़े—यहीं से खुलेगा भारत के तीसरी अर्थव्यवस्था बनने का रास्ता

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए आयात पर निर्भरता कम करनी होगी और निर्यात को मजबूती देनी होगी। उन्होंने यह बात सीएसआईआर कीटेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेरेमनी को संबोधित करते हुए कही।

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गडकरी ने जोर देते हुए कहा कि कृषि अपशिष्ट (एग्रो-वेस्ट) को उपयोगी उत्पादों में बदलकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता भी घटाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण में पेट्रोलियमरहित बायोबिटुमेन का उपयोग ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक अहम और परिवर्तनकारी कदम साबित होगा।

मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। इसमें से 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क रूसी तेल आयात के कारण लगाया गया है। इसके अलावा, वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी अस्थिरता बनी हुई है।

आयातित तेल पर निर्भरता घटाने का फॉर्मूला

नितिन गडकरी ने बताया कि यदि वाहन ईंधन में 15 प्रतिशत तक वैकल्पिक ईंधन की मिलावट की जाए, तो भारत करीब 4,500 करोड़ डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत कर सकता है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने कहा कि भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तीसरे स्थान पर पहुंचने के लिए आयात घटाना और निर्यात बढ़ाना अनिवार्य है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत व्यावसायिक स्तर पर बायोबिटुमेन का उत्पादन शुरू करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा आयातक नहीं, निर्यातक बने भारत

गडकरी ने कृषि और निर्माण उपकरण बनाने वाली कंपनियों से वैकल्पिक ईंधन और फ्लेक्सइंजन वाहनों को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों के लिए देश के 10 राष्ट्रीय राजमार्गों को चुना है, हालांकि हाइड्रोजन के परिवहन को उन्होंने एक बड़ी चुनौती बताया।

मंत्री ने कहा कि भारत को ऊर्जा का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बनना चाहिए। वर्तमान में देश हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च करता है, जिससे प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।

भूराजनीतिक तनाव के बीच अहम बयान

दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के बीच नितिन गडकरी का यह बयान खासा अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि टैरिफ लंबे समय तक बने रहते हैं तो इससे भारतीय निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में आयात घटाने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और निर्यात बढ़ाने की रणनीति भारत के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

 

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