Thursday, January 8

राजस्थान हाईकोर्ट ने शनिवार कार्यदिवस के आदेश की समीक्षा के लिए पांच न्यायाधीशों की समिति गठित की

 

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा महीने में दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किए जाने के आदेश के खिलाफ वकीलों के विरोध के बाद, अब इस आदेश की समीक्षा की जाएगी। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने के लिए पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक समिति गठित की है। समिति अपनी रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा में प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा लिया जाएगा।

 

वकीलों के विरोध के बाद लिया गया निर्णय

 

शनिवार को कार्यदिवस बनाए जाने के आदेश पर प्रदेशभर के वकील नाराज थे और उन्होंने विरोध जताया था। कई जगहों पर वकीलों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान भी किया था। बार एसोसिएशन ने यह मांग की थी कि इस आदेश पर पुनर्विचार किया जाए क्योंकि इससे न्यायिक कार्यप्रणाली और अधिवक्ताओं के कार्य-जीवन संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

 

पांच न्यायाधीशों की समिति करेगी समीक्षा

 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने एक समिति का गठन किया है, जो शनिवार को कार्यदिवस बनाए जाने से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी। इस समिति में न्यायिक कार्यभार, लंबित मामलों की स्थिति, अधिवक्ताओं की राय और प्रशासनिक आवश्यकताओं पर विचार किया जाएगा।

 

रिपोर्ट के आधार पर होगा अंतिम निर्णय

 

समिति को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी रिपोर्ट को निर्धारित समय में पूर्ण पीठ को सौंपे। इसके बाद, पूर्ण पीठ रिपोर्ट का अध्ययन करके इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेगी। तब तक वर्तमान आदेश के संबंध में स्थिति अस्पष्ट बनी रह सकती है।

 

न्यायपालिका और बार के बीच संवाद

 

इस घटनाक्रम को न्यायपालिका और बार के बीच संवाद की प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समिति का गठन इस ओर इशारा करता है कि हाईकोर्ट सभी पक्षों की बातें सुनकर संतुलित निर्णय लेना चाहता है, ताकि न्यायिक व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके और अधिवक्ताओं की चिंताओं का समाधान हो सके।

 

राजस्थान बार काउंसिल की दलील

 

राजस्थान बार काउंसिल और जयपुर तथा जोधपुर की बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की थी। इस बैठक में वकीलों ने कहा था कि यह निर्णय विधिक समुदाय से परामर्श किए बिना लिया गया है। उनका यह भी कहना था कि हाईकोर्ट के कार्यदिवस बढ़ाने का अधिकार केवल हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ को नहीं, बल्कि ‘हाईकोर्ट जज (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954’ की धारा 23ए के तहत राष्ट्रपति को प्राप्त है।

 

यह विकास राजस्थान में न्यायिक प्रक्रिया और वकील समुदाय के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रयासों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

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