Thursday, January 8

भारत बना रहेगा रफ्तार का राजा, वित्तीय वर्ष 2025-26 में जीडीपी बढ़ेगी 7.4%

नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% की मजबूत दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह अनुमान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जारी किए गए पहले एडवांस सकल घरेलू उत्पाद (GDP) आंकड़ों के आधार पर लगाया है। पिछली वित्तीय वर्ष की 6.5% विकास दर की तुलना में यह काफी उत्साहवर्धक वृद्धि है। नॉमिनल जीडीपी में भी 8.0% की बढ़ोतरी की संभावना है।

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विशेषज्ञों के अनुसार इस विकास का मुख्य कारण सेवा क्षेत्र की मजबूत गति है। इसके अलावा विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में भी अच्छा प्रदर्शन देखा जाएगा। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भी विकास की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

सेवा क्षेत्र में तेजी:

  • वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, पेशेवर सेवाएं, सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं में 9.9% की वृद्धि की संभावना है।
  • व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से जुड़े क्षेत्रों में 7.5% का उछाल देखा जा सकता है।

विनिर्माण, निर्माण और कृषि:

  • सेकेंडरी सेक्टर में 7.0% की वृद्धि का अनुमान है।
  • कृषि और संबद्ध क्षेत्र में 3.1% की वृद्धि, जबकि बिजली, गैस और जल आपूर्ति जैसी उपयोगिता सेवाओं में 2.1% की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

घरेलू मांग और निवेश मजबूत:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में भी FY 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान जताया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, GST कटौती और त्योहारी सीजन के खर्चों ने घरेलू मांग को समर्थन दिया। ग्रामीण मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि शहरी मांग धीरे-धीरे ठीक हो रही है। निजी निवेश में तेजी बनी हुई है, वहीं बाहरी मांग में नरमी के बावजूद कृषि उत्पादन और बेहतर बुवाई से विकास को मजबूती मिल रही है।

भविष्य की संभावनाएं:
RBI ने कहा कि सकारात्मक कृषि संभावनाएं, जीएसटी सुधार, कम महंगाई, कॉर्पोरेट और वित्तीय संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट और अनुकूल मौद्रिक और वित्तीय स्थिति आगे आर्थिक प्रदर्शन को बढ़ावा देंगी। सुधार उपायों के निरंतर क्रियान्वयन से विकास को अतिरिक्त बल मिलने की उम्मीद है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताएं जोखिम बनी हुई हैं, लेकिन चालू व्यापार और निवेश वार्ताओं के सफलतापूर्वक पूरा होने से अवसर भी बन सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि सेवा क्षेत्र का नेतृत्व, विनिर्माण और निर्माण में सुधार और मजबूत घरेलू मांग भारत की अर्थव्यवस्था को तेज़ गति से आगे बढ़ाएंगे।

 

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