
नई दिल्ली: दिसंबर 2025 में भारत के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ धीमी पड़ी। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई (Purchasing Managers Index) 11 महीनों के निचले स्तर पर आ गया। नए बिजनेस में कमी और घरेलू मांग में नरमी के कारण रोजगार में बढ़ोतरी रुकी, जबकि निर्यात मांग ने कुछ सहारा दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का योगदान 50% से अधिक है। इसलिए इसकी सुस्ती का असर देश की जीडीपी ग्रोथ पर भी पड़ सकता है। दिसंबर में नए ऑर्डर की गति सबसे धीमी रही, जिससे घरेलू बाजार में मांग कमजोर होने का संकेत मिला। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है।
मुख्य कारण और असर:
- मंदी मुख्य रूप से नए ऑर्डर में गिरावट के कारण हुई।
- घरेलू मांग अभी भी ठीक है, लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की सतर्कता से रफ्तार धीमी हुई।
- सेवा प्रदाताओं ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सावधानी बरती और कर्मचारियों की संख्या को स्थिर रखा।
बिजनेस सेंटिमेंट कमजोर:
भविष्य की गतिविधियों को लेकर कंपनियों का भरोसा लगातार तीसरे महीने गिरा और कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच गया। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मांग की स्थिरता को लेकर अनिश्चितता और बाजार की अस्थिरता के कारण कंपनियां 2026 में विस्तार को लेकर सतर्क हो गई हैं।
बाहरी मांग बनी मजबूत:
घरेलू मांग में नरमी के बावजूद निर्यात ऑर्डर में मजबूती रही। एशिया, उत्तरी अमेरिका, मध्य पूर्व और ब्रिटेन से लगातार मांग बनी रही। यह दिखाता है कि भारत के सेवा क्षेत्र को निर्यात से महत्वपूर्ण सहारा मिल रहा है।
महंगाई और लागत:
- महंगाई का दबाव कम रहा।
- उत्पादन लागत और आउटपुट प्राइस इनफ्लेशन लंबे समय के औसत से कम रहे।
- कंपनियों ने बढ़ी लागत को ग्राहकों पर डालने से परहेज किया, जिससे कीमतों पर नियंत्रण बना रहा।
विश्लेषण:
दिसंबर के PMI आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि भारत का सेवा क्षेत्र अभी भी मजबूत है, लेकिन धीमी ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है। नए ऑर्डर में कमी, रोजगार में ठहराव और कमजोर व्यावसायिक भरोसा यह संकेत देते हैं कि 2026 की शुरुआत में सर्विस सेक्टर अधिक सतर्क और संतुलित रफ्तार पर रहेगा। निर्यात मांग और कम महंगाई कुछ स्थिरता प्रदान कर सकते हैं, लेकिन घरेलू मांग की कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है।