Thursday, January 8

₹5.40 लाख करोड़ के बिटकॉइन छिपाए बैठा है वेनेज़ुएला? क्या क्रिप्टो बाजार पर मंडरा रहा है क्रैश का खतरा

नई दिल्ली। वेनेज़ुएला को लेकर वैश्विक वित्तीय और क्रिप्टो बाजारों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य अभियान में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद न केवल वेनेज़ुएला के विशाल तेल भंडार, बल्कि उसके संभावित क्रिप्टो एसेट्स पर भी दुनिया की नजरें टिक गई हैं। जानकारों का दावा है कि मादुरो सरकार के पास करीब 60 अरब डॉलर (लगभग ₹5.40 लाख करोड़) मूल्य के बिटकॉइन छिपे हो सकते हैं। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो इसका असर वैश्विक क्रिप्टो मार्केट पर भारी पड़ सकता है।

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सीएनबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन बिटकॉइन को बेचा गया या जब्त किया गया, तो बिटकॉइन की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है और पूरे क्रिप्टो बाजार में उथल-पुथल मच सकती है।

क्यों वेनेज़ुएला के पास बिटकॉइन होने की आशंका?

वेनेज़ुएला वर्षों से अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेल रहा है, जिसके चलते उसकी अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच बेहद सीमित हो गई थी। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने पारंपरिक सिस्टम से बाहर रहने के लिए सोना, डॉलर और बिटकॉइन जैसे वैकल्पिक एसेट्स का सहारा लिया होगा।

लैटिन अमेरिका स्थित बिटकॉइन फर्म OranjeBTC के फाउंडर और सीईओ गुई गोम्स के मुताबिक,
“यह मानना गलत नहीं होगा कि वेनेज़ुएला के पास बिटकॉइन में अच्छी-खासी हिस्सेदारी है। वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने के बाद बिटकॉइन सरकार के लिए एक अहम विकल्प रहा होगा।”

कितने बिटकॉइन और कहां रखे गए?

हालांकि 60 अरब डॉलर के आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। डिजिटल पब्लिकेशन Project Brazen ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है, लेकिन ब्लॉकचेन विशेषज्ञ अब तक इसकी पुष्टि नहीं कर पाए हैं।

जानकारों के मुताबिक, यदि वेनेज़ुएला के पास बिटकॉइन हैं, तो वे हजारों अलग-अलग वॉलेट्स में बंटे हो सकते हैं। इन वॉलेट्स पर कथित तौर पर सैन्य अधिकारियों और राजनीतिक अंदरूनी लोगों का नियंत्रण है, जिससे इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

क्रिप्टो से पुराना रिश्ता

वेनेज़ुएला का क्रिप्टोकरेंसी से पुराना नाता रहा है। साल 2018 में सरकार ने तेल-समर्थित टोकन पेट्रो’ लॉन्च किया था, जो अंततः असफल रहा और 2024 में बंद कर दिया गया। एक दौर में बिटकॉइन माइनिंग को लेकर भी सख्ती देखने को मिली—माइनर्स की गिरफ्तारी, संपत्तियों की जब्ती और बाद में पूरी तरह प्रतिबंध।

अब बिटकॉइन का क्या होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन संभावित बिटकॉइन होल्डिंग्स का भविष्य क्या होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी अधिकारी वेनेज़ुएला से जुड़े बिटकॉइन जब्त कर सकते हैं, जो सीधे अमेरिकी ट्रेजरी के पास जा सकते हैं। वहीं, यदि इन बिटकॉइन का कुछ हिस्सा खुले बाजार या एक्सचेंजों पर बेचा गया, तो इससे बिटकॉइन की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है।

निष्कर्ष:
फिलहाल वेनेज़ुएला के बिटकॉइन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अटकलें ही क्रिप्टो बाजार को असहज करने के लिए काफी हैं। अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो आने वाले दिनों में बिटकॉइन समेत पूरी क्रिप्टो इंडस्ट्री में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

 

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