
रायपुर (आकाश सिकरवार): छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में दहशत फैलाने वाले कुख्यात नक्सली देवा बारसे ने हाल ही में अपने 19 साथियों के साथ हैदराबाद में सरेंडर किया। बटालियन नंबर एक के कमांडर इन चीफ रहे देवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उन्होंने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि पुलिस ने उन्हें धोखे से पकड़कर जबरन सरेंडर करवाया।
देवा ने साफ किया कि उनके साथी और प्रसिद्ध नक्सली हिड़मा का एनकाउंटर फर्जी था। हिड़मा जब विजयवाड़ा इलाज के लिए जा रहा था, तब पुलिस ने उसे पकड़ा और मारा। देवा ने यह भी बताया कि वे हिड़मा के संपर्क में 27 अक्टूबर तक थे।
कैसे हुआ सरेंडर:
देवा ने बताया कि 29 दिसंबर को संगठन के किसी काम के सिलसिले में दो बोलेरो वाहनों से बाहर निकले थे। तभी पुलिस ने उन्हें घेर लिया। चारों तरफ से घिरने पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और करीब चार दिनों तक पूछताछ की। 3 जनवरी को हैदराबाद में उनका जबरन सरेंडर करवाया गया। वे सितंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से दिसंबर 2025 तक छत्तीसगढ़ और तेलंगाना बॉर्डर में सक्रिय थे।
संगठन और भर्ती:
देवा ने कहा कि उन्होंने 2003 में संगठन में भर्ती लिया था, जबकि हिड़मा 1997 से सक्रिय था। हिड़मा उन्हें भाई मानता था। देवा ने स्पष्ट किया कि मनीष कुंजाम द्वारा लगाए गए आरोप कि हिड़मा की हत्या उन्होंने करवाई, गलत हैं। PLGA बटालियन में केवल 15 साल से ऊपर के लड़कों को भर्ती किया जाता था।
पुलिस ऑपरेशन पर टिप्पणी:
देवा ने पुलिस के ऑपरेशन को कमतर आंका। उन्होंने बताया कि अप्रैल में कर्रेगुट्टा में होने वाले छोटे ऑपरेशन का अनुमान लगाया था, लेकिन पुलिस का व्यापक ऑपरेशन देखकर वे भी चकित रह गए। उस समय पहाड़ी पर मुठभेड़ में उनके किसी साथी की जान नहीं गई, जबकि पुलिस ने 36 साथियों को पकड़कर मार दिया।
देवा ने यह भी कहा कि उन्हें विदेश से कोई हथियार नहीं मिलता। केवल इजराइल मेड ‘तावोर’ और अमेरिकन मेड राइफल ‘कोल्ट M4’ फोर्स के पास रहती हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि बटालियन के लिए कोई संदेश नहीं देना चाहते और संगठन में आने का उद्देश्य जनता की समस्याओं को देखकर था।