
नई दिल्ली।
सपनों को सच करने के लिए कभी-कभी सुरक्षित रास्ता छोड़कर जोखिम उठाना पड़ता है। हैदराबाद के एम. वेंकट नरसिम्हा रेड्डी ने ऐसा ही साहसिक फैसला लिया। एक किसान परिवार में जन्मे वेंकट ने विदेश में मिलने वाला 1 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज ठुकराकर भारत में एयरोस्पेस हार्डवेयर और इंटेलिजेंट ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अपना डीप-टेक स्टार्टअप खड़ा किया। आज उनकी कंपनी ‘नार्गा इंजीनियरिंग’ देश को अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
किसान परिवार से संघर्षों की शुरुआत
आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव अकावेदु में जन्मे वेंकट एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी पढ़ाई के लिए पिता को अपनी 16 एकड़ कृषि भूमि बेचनी पड़ी, जिसका कर्ज वेंकट ने आगे चलकर अपनी मेहनत से चुकाया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने फॉक्सवैगन और टेक महिंद्रा जैसी वैश्विक कंपनियों में करीब 14 वर्षों तक काम किया। इस दौरान उन्हें यह अहसास हुआ कि भारत ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी आयात पर निर्भर है।
आत्मनिर्भर भारत की सोच से स्टार्टअप की नींव
इसी निर्भरता को खत्म करने के उद्देश्य से वेंकट ने वर्ष 2024 में ‘नार्गा इंजीनियरिंग’ की स्थापना की। उनका लक्ष्य केवल व्यवसाय खड़ा करना नहीं, बल्कि भारत को डीप-टेक और हार्डवेयर इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाना है। उनकी कंपनी आज ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, 5G टेलीमैटिक्स, ईवी चार्जिंग सिस्टम और इंजीनियरिंग किट जैसे उन्नत उत्पाद विकसित कर रही है।
अत्याधुनिक तकनीक पर फोकस
नार्गा इंजीनियरिंग का प्रमुख उत्पाद 5जी नेटिव टेलीमैटिक्स कंट्रोल यूनिट है, जिस पर वेंकट पिछले तीन वर्षों से शोध कर रहे थे। कंपनी ने ‘सेसला’ नाम से एक कंज्यूमर ब्रांड भी लॉन्च किया है, जिसके तहत एडवांस डैशबोर्ड कैमरे बाजार में उतारे गए हैं। ये कैमरे भारतीय सड़कों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। इसके साथ ही कंपनी भविष्य की 6जी और 7जी तकनीक पर आधारित सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
छात्रों और भविष्य की तकनीक पर नजर
वेंकट का मानना है कि देश का असली विकास तभी संभव है, जब इंजीनियरिंग छात्र वास्तविक हार्डवेयर पर काम करें। इसी उद्देश्य से उन्होंने 3,000 से 5,000 रुपये की किफायती आरएंडडी किट तैयार की है। कंपनी के भविष्य के रोडमैप में कृषि ड्रोन, ईवी चार्जर्स और पैसेंजर ड्रोन शामिल हैं, जो शहरों में यात्रा का समय 10 मिनट से भी कम कर सकते हैं। उनका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 6,000 से 12,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन हासिल करना है।
13 साल की बचत, तीन दिन बिना नींद
इस स्टार्टअप की सबसे खास बात यह है कि वेंकट ने इसमें अपनी 13 वर्षों की पूरी बचत, करीब 4.5 करोड़ रुपये, निवेश किए हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने खुद हार्डवेयर बोर्ड तैयार किए, कोडिंग की और कई बार दो से तीन दिन तक बिना सोए काम किया। आज उनकी टीम में 11 विशेषज्ञ इंजीनियर शामिल हैं और वे जल्द ही 10 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रहे हैं।
प्रेरणा बनती एक मिसाल
एम. वेंकट नरसिम्हा रेड्डी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही कौशल, कड़ी मेहनत और देश के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो एक किसान का बेटा भी भारत की धरती पर दुनिया की सबसे जटिल तकनीक विकसित कर सकता है। यह सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है।