Friday, June 12

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अमेरिका की राह पर चीन? ताइवान पर कब्जे को लेकर ट्रंप को पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन की चेतावनी

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति और भारत पर टैरिफ की धमकियों के बीच, चीन द्वारा ताइवान पर संभावित कब्जे को लेकर नई बहस छिड़ गई है। इस मुद्दे पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वेनेजुएला के मामले और ताइवान की स्थिति को एक तराजू में नहीं तौला जा सकता।

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आईएएनएस से बातचीत में जॉन बोल्टन ने कहा कि अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में की गई कार्रवाई की परिस्थितियां अलग थीं, जबकि चीन द्वारा ताइवान को धमकाना अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर चिंता
भारत पर टैरिफ लगाने की ट्रंप की धमकी पर बोल्टन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बातचीत पूरी होने से पहले इस तरह की घोषणाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों का फिर से मजबूत होना जरूरी है, क्योंकि चीन की बढ़ती दबदबे की नीति को लेकर दोनों देशों की चिंताएं साझा हैं।

वेनेजुएला की कार्रवाई को बताया अलग मामला
वेनेजुएला को लेकर बोल्टन ने कहा कि वहां 2024 का चुनाव धांधली से जीता गया था और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की वैधता पर सवाल हैं। उन्होंने 1990 में पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिएगा के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ परिस्थितियों में ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ नहीं माने जाते।

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि रूस का यूक्रेन पर हमला या चीन का ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश बिल्कुल अलग और गलत होगी।

ताइवान पर चीन की धमकियां गंभीर
जॉन बोल्टन ने कहा कि चीन लंबे समय से ताइवान को धमका रहा है, लेकिन ताइवान के लोग बार-बार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के जरिए यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे मुख्य भूमि चीन में शामिल नहीं होना चाहते। उन्होंने कहा कि ताइवान एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार है और वहां के लोगों को आत्मनिर्णय का पूरा अधिकार है। चीन की धमकियां अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए वास्तविक खतरा हैं।

ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बयान को बताया ‘मोलभाव’
ग्रीनलैंड पर कब्जे की ट्रंप की टिप्पणी को लेकर बोल्टन ने इसे ‘ट्रोलिंग’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप अक्सर चौंकाने वाले बयान देकर मोलभाव की रणनीति अपनाते हैं। हालांकि, अगर अमेरिका ने वास्तव में ग्रीनलैंड के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, तो यह नाटो गठबंधन के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है और अमेरिका के लिए एक बड़ी रणनीतिक भूल होगी।

कुल मिलाकर, जॉन बोल्टन का मानना है कि वेनेजुएला, ताइवान और ग्रीनलैंड जैसे मामलों को एक नजर से देखना गलत होगा। ताइवान पर चीन का कोई भी सैन्य कदम न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

 

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