Thursday, January 8

‘पब्लिसिटी के लिए दाखिल की गई PIL’, लिंगदोह समिति की रिपोर्ट लागू करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज

 

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2006 की लिंगदोह समिति की रिपोर्ट लागू करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने याचिका को ‘पब्लिसिटी इंट्रेस्ट लिटिगेशन’ करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल मीडिया और प्रचार के जरिए ध्यान आकर्षित करना था।

 

याचिका शिव कुमार त्रिपाठी ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र निकायों के निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए दायर की थी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट पहले ही सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए अनिवार्य कर दी गई है।

 

लिंगदोह समिति की रिपोर्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था, जिसका उद्देश्य छात्र संघ चुनावों में धन और बाहुबल के प्रभाव को समाप्त करना और शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना था। रिपोर्ट में स्नातक छात्रों के लिए आयु सीमा 17-22 वर्ष और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए 24-25 वर्ष निर्धारित की गई थी। इसके अलावा, चुनावों के लिए अन्य नियामक उपाय भी सुझाए गए थे।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका केवल प्रचार और पब्लिसिटी के लिए दायर की गई थी, इसमें कोई ठोस आधार नहीं है। सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी गई।

 

 

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