
लखनऊ (राहुल पराशर): राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में रविवार देर रात अफरातफरी मच गई, जब पल्मोनरी वार्ड की तीसरी मंजिल पर स्थित वेटिंग हॉल में दुर्लभ भारतीय सिवेट बिल्ली दिखाई दी। बिल्ली को देखते ही मरीज और तीमारदार हड़कंप मच गए।
सूचना मिलने पर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। विशेषज्ञ इरशाद ने काफी मशक्कत के बाद बिल्ली को सुरक्षित पकड़ लिया और उसे गौतम खेड़ा जंगल में छोड़ दिया। राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी को कोई चोट नहीं आई। सिवेट बिल्ली को पकड़ना या नुकसान पहुंचाना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
पूरी घटना:
SGPGI के पल्मोनरी वार्ड बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर सिवेट बिल्ली देखी गई। सुरक्षा गार्ड को इसकी सूचना रात करीब 1 बजे कंट्रोल रूम में दी गई। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने बिल्ली को बिना किसी नुकसान के पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा।
सिवेट बिल्ली क्यों खास है?
स्थानीय नाम: कस्तूरी बिलाव या गंधमार्जार
स्वभाव: निशाचर जीव, रात में सक्रिय, शर्मीला और मानव बस्तियों से दूर रहने वाला
प्रजाति: संरक्षित, पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण
विशेषता: शरीर से निकलने वाली सुगंध इत्र निर्माण में काम आती है और इसी प्रजाति के खाए कॉफी बीन्स से दुनिया की सबसे महंगी कॉफी ‘कोपी लुवाक’ तैयार होती है।
भारतीय सिवेट बिल्ली पर्यावरण में चूहों की आबादी नियंत्रित करने और बीजों के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। SGPGI में उसकी उपस्थिति ने मरीजों और कर्मचारियों के बीच हलचल मचा दी, लेकिन रेस्क्यू के बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई।