
रांची: नए साल के साथ ही झारखंड की राजनीति में बड़े बदलाव की खबरें सुनाई दे रही हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी सरकार की छवि सुधारने और विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल की तैयारी में हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकार अब अपने मंत्रियों के कामकाज का ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ कर रही है। माना जा रहा है कि 14 जनवरी (खरमास समाप्ति) के बाद किसी भी समय नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण हो सकता है। इस फेरबदल की मुख्य वजह कुछ विभागों का कमजोर प्रदर्शन और जनता में बढ़ती नाराजगी बताई जा रही है।
स्वास्थ्य और कृषि विभाग में संभावित बदलाव
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वर्ष 2026 स्वास्थ्य और कृषि विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के विभाग की स्थिति से मुख्यमंत्री संतुष्ट नहीं हैं। उनकी जगह पाकुड़ से विधायक निशात आलम को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे अल्पसंख्यक और महिला वोट बैंक को साधने का प्रयास होगा।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की जगह भी किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है। कांग्रेस कोटे से राजेश कच्छप, रामचंद्र सिंह, सोनाराम सिंकु और नमन विक्सल कोगाड़ी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।
झामुमो और राजद कोटे में भी बदलाव
कांग्रेस के अलावा गठबंधन के अन्य दलों में भी नए चेहरों को जगह दी जा सकती है। पूर्व मंत्री स्वर्गीय रामदास सोरेन के निधन से खाली हुई जगह पर उनके पुत्र सोमेश सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है। वहीं राजद कोटे से संजय प्रसाद यादव की जगह विधायक दल के नेता सुरेश पासवान को मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
सरकार का मकसद
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चाहते हैं कि सरकार ‘फुल कॉन्फिडेंस’ और ‘फुल स्पीड’ के साथ काम करे। जिन विभागों में जनता की शिकायतें अधिक हैं, उनके मंत्रियों को हटाकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।