
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट इतिहास में 1983 विश्व कप का नाम सुनते ही हर क्रिकेट प्रेमी के जहन में एक ही चेहरा उभरता है — कपिल देव। आज 6 जनवरी को भारतीय क्रिकेट के महान ऑलराउंडर और विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव 67 वर्ष के हो गए हैं।
वनडे क्रिकेट में भारत की शुरुआत काफी औसत रही थी। पहले दो विश्व कप में टीम को केवल एक ही जीत मिली थी। लेकिन तीसरे विश्व कप में कपिल देव की कप्तानी में भारतीय टीम ने दुनिया को चौंका दिया।
1975 में पहला विश्व कप खेला गया था, जिसमें भारत को इंग्लैंड से करारी हार मिली थी। 1979 के विश्व कप में टीम का खाता भी नहीं खुला। लेकिन 1983 विश्व कप में कपिल देव की कप्तानी में भारतीय टीम ने अपने पहले ही मैच में वेस्टइंडीज को हराकर सभी को हैरान कर दिया। वेस्टइंडीज पहले दोनों विश्व कप जीत चुकी थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को हराकर भारत ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में इंग्लैंड और फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर भारत ने पहला विश्व कप खिताब अपने नाम किया।
कपिल देव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलते हुए केवल 17 रन पर 5 विकेट गिरने के बाद 175 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली। यह वनडे में किसी भारतीय बल्लेबाज का पहला शतक था और इसे वनडे इतिहास की सबसे बेहतरीन पारियों में गिना जाता है। इस पारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदला बल्कि भारतीय टीम के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया।
कपिल देव का क्रिकेट करियर और उपलब्धियां:
- भारत के लिए डेब्यू: 1978
- अंतिम मैच: 1994
- टेस्ट में 131 मैच, 434 विकेट, 5248 रन, 8 शतक
- वनडे में 225 मैच, 253 विकेट, 3783 रन
- वनडे में 200 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज
- तेज गेंदबाजी की भारतीय क्रिकेट में नई पहचान
सम्मान और अवार्ड:
- 1982: पद्म श्री
- 1991: पद्म भूषण
- 2002: विस्डेन द्वारा इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी
- 2010: आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम
- 2013: बीसीसीआई द्वारा सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
कपिल देव न केवल एक महान खिलाड़ी थे, बल्कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई और यह साबित किया कि भारतीय टीम बड़े मंच पर भी जीत सकती है। आज उनके जन्मदिन पर उन्हें याद करना हर क्रिकेट प्रेमी के लिए गर्व की बात है।