
पटना/वैशाली: तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुमार कुशवाहा ने सोमवार को लालगंज थाने के थानाध्यक्ष संतोष कुमार और सब-इंस्पेक्टर सुमनजी झा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। इन पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए कीमती सामान और नकदी को आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज न कर खुद हड़प लिया।
पूरा मामला
यह घटना 30 दिसंबर, 2025 की है, जब लालगंज पुलिस की टीम ने थानाध्यक्ष संतोष कुमार और SI सुमनजी झा के नेतृत्व में बिलनपुर गांव में रामप्रीत सहनी के घर छापेमारी की थी। आधिकारिक रिपोर्ट में केवल तीन टीवी, दो जिंदा कारतूस, एक खाली खोखा और कुछ तांबे के बर्तन जब्त होने का उल्लेख किया गया। इस दौरान सहनी की पत्नी को भी गिरफ्तार किया गया।
करोड़ों की जब्ती ‘गायब’
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि छापेमारी के दौरान पुलिस ने लगभग 50 लाख रुपये नकद, 2 किलो सोना और 6 किलो चांदी जब्त की थी, लेकिन इसे जब्ती सूची में शामिल नहीं किया गया और नियमानुसार वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई।
SDPO और SP की जांच में खुली पोल
लालगंज SDPO गोपाल मंडल को जब्ती सूची में हेराफेरी की गुप्त सूचना मिली। उन्होंने वैशाली SP ललित मोहन शर्मा को सूचित किया। SP द्वारा कराई गई जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद डीआईजी को FIR दर्ज करने की सिफारिश भेजी गई। भ्रष्टाचार के आरोपी दोनों अधिकारियों को 4 जनवरी को निलंबित किया गया। SP ने इसे “वर्दी को शर्मसार करने वाली घटना” बताया।
पुराना विवादास्पद रिकॉर्ड
आरोपी SI सुमनजी झा पहले भी विवादों में रह चुके हैं। साल 2024 में मुजफ्फरपुर में तैनाती के दौरान विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें 11,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। वह मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है, लेकिन उनके आचरण में कोई सुधार नहीं आया।