Thursday, January 1

‘इक्कीस’: कौन थे पाकिस्तानी ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर, जिन्होंने वीर अरुण खेत्रपाल के पिता से कहा—‘आपके बेटे को मैंने शहीद किया’

 

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नई दिल्ली। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की एक मार्मिक और सच्ची घटना को निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म ‘इक्कीस’ बड़े पर्दे पर लेकर आई है। 1 जनवरी को रिलीज हुई इस फिल्म में अभिनेता अगस्त्य नंदा ने परमवीर चक्र विजेता सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है, जबकि जयदीप अहलावत पाकिस्तानी सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर की भूमिका में नजर आते हैं। अभिनेता धर्मेंद्र इस फिल्म में अरुण खेत्रपाल के पिता ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

 

फिल्म का सबसे भावनात्मक पहलू वह दृश्य है, जिसमें पाकिस्तानी ब्रिगेडियर नसीर, अरुण खेत्रपाल के पिता से यह स्वीकार करते हैं कि 1971 की बसंतर की लड़ाई में उन्होंने ही उनके बेटे को गोली मारी थी।

 

कौन थे ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर?

 

ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर पाकिस्तान सेना की 13 लांसर्स रेजिमेंट के वरिष्ठ अधिकारी थे। वे 1971 के युद्ध में बसंतर सेक्टर में भारतीय सेना के सामने तैनात थे। इसी युद्ध में सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त किया और मात्र 21 वर्ष की उम्र में वीरगति को प्राप्त हुए।

 

लाहौर एयरपोर्ट पर ऐतिहासिक मुलाकात

 

अरुण खेत्रपाल के शहीद होने के कई वर्षों बाद, 2001 में उनके पिता ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल अपने जन्मस्थान सरगोधा (अब पाकिस्तान में) जाने के लिए लाहौर पहुंचे। वहीं लाहौर एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात ब्रिगेडियर नसीर से हुई। यह मुलाकात न केवल अप्रत्याशित थी, बल्कि भावनाओं से भरी हुई भी।

 

फिल्म ‘इक्कीस’ में दिखाया गया है कि ब्रिगेडियर नसीर ने ब्रिगेडियर खेत्रपाल का अत्यंत सम्मान और गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने उन्हें अपने घर ठहराया और तीन दिनों तक अपने परिवार का अतिथि बनाए रखा। इस दौरान ब्रिगेडियर खेत्रपाल को यह एहसास होता रहा कि नसीर और उनका परिवार उनसे कुछ कहना चाहता है।

 

जब नसीर ने कहा—‘आपका बेटा हमारी हार का कारण था’

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक दिन ब्रिगेडियर नसीर ने ब्रिगेडियर खेत्रपाल को उस स्थान पर ले जाकर पूरी घटना बताई, जहां अरुण खेत्रपाल शहीद हुए थे। उन्होंने कहा—

“ब्रिगेडियर साहब, आपका बेटा अत्यंत वीर था। हमारी हार के लिए वही जिम्मेदार था। आखिरकार युद्ध के अंतिम क्षणों में वही और मैं आमने-सामने थे।”

 

नसीर ने स्वीकार किया कि दोनों टैंकों से एक साथ गोलीबारी हुई, लेकिन उस संघर्ष में अरुण खेत्रपाल शहीद हो गए। यह स्वीकारोक्ति उनके लिए भी भावनात्मक बोझ से मुक्ति का क्षण थी।

 

परमवीर चक्र से सम्मानित थे अरुण खेत्रपाल

 

सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल को 1971 के युद्ध में अद्वितीय वीरता और बलिदान के लिए परमवीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित किया गया था। वे भारतीय सेना के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेताओं में से एक हैं।

 

फिल्म ‘इक्कीस’ न केवल युद्ध की कहानी है, बल्कि यह साहस, सम्मान, मानवीय संवेदना और दुश्मन देशों के सैनिकों के बीच मौजूद अदृश्य सम्मान की भी एक गहरी झलक प्रस्तुत करती है।

 

 

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