Thursday, January 1

‘इक्कीस’ को दर्शकों का भरपूर प्यार, अगस्त्य नंदा की अभिनय-पारी ने जीता दिल, आखिरी 20 मिनट में खड़े हो गए रोंगटे

 

This slideshow requires JavaScript.

मुंबई। वर्ष 2026 के पहले दिन रिलीज हुई फिल्म ‘इक्कीस’ ने सिनेमाघरों में दस्तक देते ही दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींच लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। अधिकांश दर्शकों ने फिल्म को मास्टरपीस करार दिया है, वहीं इसके अंतिम 20 मिनट को इतना प्रभावशाली बताया जा रहा है कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

 

निर्देशक श्रीराम राघवन की इस फिल्म में अभिनेता अगस्त्य नंदा ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए परमवीर चक्र विजेता सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है। यह अगस्त्य नंदा के करियर की अब तक की सबसे सशक्त और सराही गई परफॉर्मेंस मानी जा रही है।

 

धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ने किया भावुक

 

फिल्म की एक और बड़ी खासियत दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र हैं, जिनकी यह आखिरी फिल्म बताई जा रही है। धर्मेंद्र ने अरुण खेत्रपाल के पिता ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल की भूमिका निभाई है। दर्शकों ने लिखा है कि धर्मेंद्र की मौजूदगी फिल्म को एक अलग ही भावनात्मक गहराई देती है और कई दृश्य दर्शकों की आंखें नम कर देते हैं।

 

जयदीप अहलावत की दमदार भूमिका

 

फिल्म में जयदीप अहलावत ने पाकिस्तानी सेना के अधिकारी ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर का किरदार निभाया है। सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक, जयदीप ने अपने अभिनय से एक विरोधी किरदार को भी मानवीय और प्रभावशाली बना दिया है।

 

X पर क्या बोले दर्शक

 

फिल्म देखने के बाद दर्शकों ने X पर लिखा—

“देशभक्ति और वीरता अपने चरम पर है”

“पलक तक नहीं झपकती, आखिरी 20 मिनट रोंगटे खड़े कर देते हैं”

“2026 की शानदार शुरुआत, प्रेरणादायक कहानी”

“इक्कीस साल का वो सपूत हमेशा याद रहेगा”

 

कई यूजर्स ने अगस्त्य नंदा को उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस के लिए बधाई दी, वहीं धर्मेंद्र को पर्दे पर देखकर भावुक होने की बात भी कही।

 

कौन थे अरुण खेत्रपाल

 

फिल्म ‘इक्कीस’ भारतीय सेना के उस वीर सपूत की कहानी है, जिन्हें मात्र 21 वर्ष की उम्र में मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 1971 के युद्ध में अरुण खेत्रपाल ने दुश्मन के 10 टैंकों को नष्ट कर दिया था। स्वयं पाकिस्तानी ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर ने बाद में स्वीकार किया था कि अरुण खेत्रपाल की वीरता ही पाकिस्तान की हार का कारण बनी।

 

कुल मिलाकर, ‘इक्कीस’ न केवल एक युद्ध फिल्म है, बल्कि यह साहस, बलिदान, देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से छूती एक प्रेरक सिनेमाई कृति बनकर उभरी है।

 

Leave a Reply