
नई दिल्ली।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की हालिया कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चीन से अत्याधुनिक SY-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद और पाकिस्तान के साथ संभावित गुप्त रक्षा समझौते की चर्चाओं ने भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाक्रमों से क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
चीन से SY-400 मिसाइल की डील
बांग्लादेश ने हाल ही में चीन से SY-400 कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली खरीदने का समझौता किया है। यह मिसाइल अपनी सटीक मारक क्षमता के लिए जानी जाती है। बांग्लादेश सरकार इसे सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम बता रही है। इससे पहले भी चीन से J-10C फाइटर जेट खरीद को लेकर ढाका चर्चा में रहा था।
चीनी हथियारों पर बढ़ती निर्भरता
अंतरराष्ट्रीय रक्षा शोध संस्थान SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश द्वारा हाल के वर्षों में खरीदे गए लगभग 70 प्रतिशत हथियार चीन से आए हैं। शेख हसीना सरकार के बाद बनी मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने चीन के साथ संबंधों को नई गति दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अपेक्षाकृत सस्ते और त्वरित आपूर्ति वाले चीनी हथियार कई विकासशील देशों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
पाकिस्तान के साथ गुप्त रक्षा समझौते की अटकलें
इसी बीच, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच एक संभावित गुप्त रक्षा समझौते की खबरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए एक व्यापक खाका तैयार कर रहे हैं। हाल के महीनों में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के अधिकारियों की ढाका यात्राओं के बाद इन अटकलों को और बल मिला है।
ISI संपर्क और रणनीतिक समीकरण
सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, खुफिया साझाकरण और रणनीतिक समन्वय बढ़ाया जा सकता है। हालांकि बांग्लादेश सरकार ने