Thursday, May 14

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बांग्लादेश में हिंसा के बीच भारत की चिंता बढ़ी, रोहिंग्या के प्रवेश को लेकर सतर्कता

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद फैली हिंसा ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा कर दी हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि मौजूदा उथल-पुथल का फायदा उठाकर रोहिंग्या शरणार्थी सीमा पार कर भारत में प्रवेश कर सकते हैं।

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बांग्लादेश में बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी हैं, वहीं म्यांमार में गृहयुद्ध के कारण भी कई रोहिंग्या भारतीय सीमाओं की ओर बढ़ना चाहते हैं। न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने यह चेतावनी दी है कि सीमा पर अस्थिरता और असंगठित कोऑर्डिनेशन के कारण रोहिंग्या के भारत आने का खतरा बढ़ गया है।

रोहिंग्या घुसपैठ के तरीके:

  • खुफिया सूत्रों के मुताबिक, रोहिंग्या मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में नदी मार्ग और असम तथा त्रिपुरा के जंगलों से भारत में प्रवेश करते हैं।
  • कुछ गिरोह जाली दस्तावेज और तस्करी के रास्तों का इस्तेमाल कर उन्हें भारत, मलेशिया और खाड़ी देशों तक भेजते हैं।
  • भारतीय एजेंसियों ने असम, पश्चिम बंगाल, जम्मू, दिल्ली और हैदराबाद में रोहिंग्या से जुड़ी कई गिरफ्तारियां की हैं।

जाली पहचान और सामाजिक प्रभाव:
रोहिंग्याओं के प्रवेश में जाली आधार कार्ड नेटवर्क भी मददगार साबित हो रहा है। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक, रोहिंग्या प्रवासी शहरी इलाकों में तेजी से बस रहे हैं और अनौपचारिक मजदूर बाजारों में काम कर रहे हैं, जहाँ वेरिफिकेशन कमजोर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ कट्टरपंथी गुट रोहिंग्याओं को हिंसा फैलाने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में भारत में उनकी बढ़ती संख्या सामाजिक तनाव और सुरक्षा में गंभीर बदलाव ला सकती है।

बांग्लादेश में हिंसा की वजह:
हिंसा की शुरुआत युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद हुई। हादी शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन का अहम चेहरा थे और फरवरी 2026 के चुनाव में भाग लेने की तैयारी कर रहे थे। उनकी हत्या के बाद ढाका समेत कई शहरों में आगजनी और तोड़फोड़ हुई।

भारत सतर्क:
खुफिया एजेंसियों ने सीमा पर सुरक्षा और निगरानी को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं और राज्य सरकारों को भी अलर्ट पर रहने की चेतावनी दी है।

 

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