Thursday, May 21

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US-India ट्रेड डील फंसी: टैरिफ और कृषि मुद्दों ने बातचीत में रोड़ा डाला

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच संभावित व्यापार समझौता इस समय अटक गया है। ट्रंप के दोबारा कार्यकाल की शुरुआत में दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाइयों पर जाने की उम्मीद थी, लेकिन एक साल के भीतर स्थिति उलट गई। अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लागू किया है, जिससे भारत दुनिया के सबसे अधिक टैरिफ वाले देशों में शामिल हो गया है, यहां तक कि चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

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बातचीत क्यों अटक गई?

हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल और भारतीय अधिकारियों के बीच एक और दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिली। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बातचीत में सबसे बड़ी बाधा राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील मुद्दे हैं।

  • टैरिफ और ऊर्जा: अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल के आयात में कटौती करे। अगस्त में अमेरिकी सरकार ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल शुल्क 50% तक बढ़ गया। हालांकि भारत ने रूस से आयात कम किया है, लेकिन हाल में भारतीय रिफाइनर्स ने कुछ कंपनियों से खरीदारी फिर से शुरू कर दी।
  • कृषि क्षेत्र: अमेरिका भारत में कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना चाहता है। इसमें जीन-मॉडिफाइड फसलें और डेयरी उत्पाद शामिल हैं। भारत की घरेलू कृषि लॉबी इसे गंभीरता से विरोध कर रही है।

एक्सपर्ट की राय

पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के सीनियर एडवाइजर मार्क लिंसकोट का कहना है कि टैरिफ और कृषि हमेशा कठिन मुद्दे होते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और घरेलू दबाव इस डील को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।

भविष्य की संभावना

विश्लेषकों के अनुसार, यदि रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता होता है तो भारत पर लगे 25% टैरिफ में कमी आ सकती है। लेकिन कृषि और डेयरी निर्यात पर विवाद लंबे समय तक अड़चन बने रह सकते हैं, जिससे ट्रेड डील में और देरी होगी।

दोनों देशों के लिए यह समझौता महत्वपूर्ण है: अमेरिका को चीन के बाहर भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर की जरूरत है, जबकि भारत को अपने उत्पादों की अमेरिकी बाजार तक पहुंच चाहिए। इस जटिल मसले को सुलझाने में दोनों देशों को राजनीतिक संतुलन और दीर्घकालीन रणनीति अपनानी होगी।

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