Thursday, May 21

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2018 यूपी पुलिस सिपाही भर्ती: बैच के आधार पर वेतन में अंतर असंवैधानिक, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2018 की उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल प्रशिक्षण तिथियों या बैच के आधार पर चयनित सिपाहियों के वेतन और सेवा लाभों में अंतर नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

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यह फैसला न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस नीति को मनमाना और असंवैधानिक करार दिया, जिसके तहत एक ही चयन प्रक्रिया से नियुक्त सिपाहियों को अलग-अलग प्रशिक्षण बैचों के आधार पर ‘पे प्रोटेक्शन’ के लाभ से वंचित किया गया था।

एक चयन प्रक्रिया, तो सेवा लाभ भी समान

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब सभी अभ्यर्थियों की नियुक्ति एक ही विज्ञापन, एक ही चयन प्रक्रिया और एक ही अंतिम चयन सूची के आधार पर हुई है, तो उन्हें समान वेतन और समान सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि बैच के आधार पर वेतन में भेदभाव करना कानूनन टिकाऊ नहीं है।

12 सप्ताह में सभी को मिले पे प्रोटेक्शन

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 12 सप्ताह के भीतर 2018 भर्ती के अंतर्गत नियुक्त सभी सिपाहियों को पहले बैच के समान ‘पे प्रोटेक्शन’ का लाभ प्रदान करे। साथ ही इससे उत्पन्न होने वाले सभी परिणामी सेवा लाभ भी दिए जाएं।

हजारों सिपाहियों को मिलेगा लाभ

इस फैसले से 2018 की भर्ती के तहत नियुक्त हजारों पुलिस सिपाहियों को समान वेतन और सेवा अधिकार मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह निर्णय भविष्य में सरकारी भर्तियों में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम मिसाल माना जा रहा है।

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