Saturday, July 25

Bihar

बिहार की सियासत में ‘निशांत’ उदय? JDU पोस्टर, ललन सिंह की सलाह और नीतीश की मुस्कान
Bihar, State

बिहार की सियासत में ‘निशांत’ उदय? JDU पोस्टर, ललन सिंह की सलाह और नीतीश की मुस्कान

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में आने की चर्चाओं ने फिर से जोर पकड़ लिया है। पटना में हाल ही में आयोजित सरस्वती पूजा के दौरान मुख्यमंत्री और निशांत कुमार की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया। कार्यक्रम में निशांत कुमार पहले पहुंचे और पूजा-अर्चना की। बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन के बाद दोनों पिता-पुत्र की मुलाकात हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने निशांत की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब उन्हें राजनीति में आ जाना चाहिए। नीतीश कुमार ने इस टिप्पणी पर मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं। जेडीयू पोस्टर ने बढ़ाई चर्चा इससे पहले पटना में जेडीयू के छात्र संगठन ने निशांत कुमार को लेकर पोस्टर लगाकर पार्टी में उनके शामिल होने की मांग की थी। पोस्टर मे...
आरक्षण की आग में झुलसी कर्पूरी सरकार: दो बार सीएम बने, कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए
Bihar, State

आरक्षण की आग में झुलसी कर्पूरी सरकार: दो बार सीएम बने, कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए

पटना। बिहार के जुझारू नेता कर्पूरी ठाकुर की आज जयंती है। 24 जनवरी 1924 को जन्मे और 17 फरवरी 1988 को निधन होने वाले कर्पूरी ठाकुर ने विपरीत परिस्थितियों में दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। उनकी सरकारें राजनीतिक गुटबाजी और आरक्षण विरोधी आंदोलन की आग में झुलस गईं। पहली बार 1970 में बनी कर्पूरी सरकार कर्पूरी ठाकुर पहली बार दिसंबर 1970 में मुख्यमंत्री बने। इस दौरान उन्हें भोला पासवान शास्त्री की चुनौती झेलनी पड़ी। कांग्रेस के इंदिरा गुट का समर्थन लेने वाले शास्त्री मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक थे, लेकिन राज्यपाल ने कर्पूरी ठाकुर को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया। संसोपा और घटक दलों के सहयोग से उन्होंने 52 सदस्यीय मंत्रिमंडल बनाया। हालांकि, पार्टी की गुटबाजी और गठबंधन की मजबूरियों के कारण उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। 1977 में जनता पार्टी से दूसरी बार ब...
नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा: वैशाली को करोड़ों की सौगात, महुआ मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण बाबा बटेश्वर नाथ धाम में पूजा-अर्चना और जल-जीवन-हरियाली परियोजनाओं का उद्घाटन
Bihar, State

नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा: वैशाली को करोड़ों की सौगात, महुआ मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण बाबा बटेश्वर नाथ धाम में पूजा-अर्चना और जल-जीवन-हरियाली परियोजनाओं का उद्घाटन

हाजीपुर। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपनी 'समृद्धि यात्रा' के तहत वैशाली जिले में पहुंच रहे हैं। लगभग तीन घंटे के इस दौरे में सीएम महुआ में 463 करोड़ रुपये की लागत से बने राजकीय मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करेंगे, बाबा बटेश्वर नाथ धाम में पूजा-अर्चना करेंगे और जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत तैयार की गई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, वह जीविका दीदियों से संवाद करेंगे और एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री के प्रवास को विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अहम माना जा रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और महुआ में दो विशेष हेलीपैड भी बनाए गए हैं। महुआ मेडिकल कॉलेज का स्पॉट विजिट मुख्यमंत्री का मुख्य आकर्षण महुआ के छतवारा में 463 करोड़ रुपये की लागत से बने राजकीय मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण है। 22 एकड़ में फैले इस परिसर का शिलान्यास सीएम ने 2021 में ...
कांग्रेस विधायकों की दिल्ली बैठक में तय हुआ राजद से अलग होने का रुख मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में छह विधायकों ने किया पार्टी लाइन का समर्थन
Bihar, State

कांग्रेस विधायकों की दिल्ली बैठक में तय हुआ राजद से अलग होने का रुख मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में छह विधायकों ने किया पार्टी लाइन का समर्थन

पटना। बिहार कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही टूट की अटकलों पर विराम लग गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित बैठक में कांग्रेस के सभी छह विधायक मौजूद रहे और पार्टी के अनुशासन को लेकर अपना समर्थन जताया। इससे पहले जदयू और बीजेपी की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि बिहार के कुछ कांग्रेस विधायक एनडीए में शामिल होने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली की बैठक में अनुशासन बनाए रखना केंद्रीय मुद्दा रहा। खरगे ने प्रदेश कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों और विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर केवल अधिकृत लोग ही पार्टी लाइन के अनुसार बयान देंगे। पार्टी लाइन से हटकर बोलने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। बैठक में मुख्य चर्चा यह रही कि बिहार में कांग्रेस राजद के साथ गठबंधन बनाए रखे या अकेले दम पर च...
‘तुम भी आए हो जी!’ बेटे निशांत को देख हैरान रह गए नीतीश कुमार सरस्वती पूजा के दौरान पिता-पुत्र की मुलाकात बनी चर्चा का विषय, राजनीति में एंट्री पर भी उठे सवाल पटना।
Bihar, State

‘तुम भी आए हो जी!’ बेटे निशांत को देख हैरान रह गए नीतीश कुमार सरस्वती पूजा के दौरान पिता-पुत्र की मुलाकात बनी चर्चा का विषय, राजनीति में एंट्री पर भी उठे सवाल पटना।

सरस्वती पूजा के अवसर पर पटना में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) आईटी सेल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके पुत्र निशांत कुमार एक ही मंच पर नजर आए। पिता-पुत्र की यह मुलाकात सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर सबसे पहले निशांत कुमार पहुंचे और मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की। कुछ देर बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने केंद्रीय मंत्री एवं जदयू सांसद ललन सिंह और वरिष्ठ नेता विजय चौधरी के साथ पहुंचे। जैसे ही नीतीश कुमार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, निशांत ने अपने पिता का अभिवादन किया। इस पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और बोले—"तुम भी आए हो जी!"। इसके बाद दोनों ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। कार्यक्रम के दौरान निशांत कुमार ने ललन सिंह और विजय चौधरी के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी नेताओं ने एक साथ मां सरस्वती की पूजा की।...
वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुल राज बने पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश जानिए—शिक्षा से लेकर न्यायिक सफर तक की पूरी कहानी
Bihar, State

वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुल राज बने पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश जानिए—शिक्षा से लेकर न्यायिक सफर तक की पूरी कहानी

पटना। पटना उच्च न्यायालय को नया न्यायाधीश मिल गया है। भारत के राष्ट्रपति ने वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुल राज को पटना हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया है। इस संबंध में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से शुक्रवार शाम अधिसूचना जारी की गई। अंशुल राज की नियुक्ति की खबर से विधि जगत और उनके शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। न्यायमूर्ति (नामित) अंशुल राज का जन्म वर्ष 1971 में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना में ही हुई। उन्होंने सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद पटना साइंस कॉलेज से विज्ञान संकाय में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2003 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन के बाद अंशुल राज ने अपने विधिक करियर की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से की। ...
बेटे और पत्नी को खोने के बाद भी नहीं टूटा हौसला 75 वर्ष की उम्र में रातभर मरीजों की सेवा कर रहे गया के ‘भगवान’ डॉ. संकेत नारायण सिंह
Bihar, State

बेटे और पत्नी को खोने के बाद भी नहीं टूटा हौसला 75 वर्ष की उम्र में रातभर मरीजों की सेवा कर रहे गया के ‘भगवान’ डॉ. संकेत नारायण सिंह

गयाजी। जहां आज चिकित्सा सेवा तेजी से व्यवसाय का रूप लेती जा रही है, वहीं बिहार के गयाजी जिले में एक डॉक्टर मानवता और सेवा की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है। 75 वर्ष की उम्र में भी डॉ. संकेत नारायण सिंह रातभर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उनके लिए चिकित्सा कमाई का साधन नहीं, बल्कि आजीवन सेवा का माध्यम है। गया शहर के मारनपुर इलाके में स्थित अपने छोटे से क्लिनिक में डॉ. संकेत नारायण सिंह शाम करीब पांच बजे मरीज देखना शुरू करते हैं, जो कई बार अगली सुबह चार या पांच बजे तक चलता है। लकड़ी की साधारण कुर्सी पर बैठकर वे प्रतिदिन औसतन 300 मरीजों की जांच करते हैं। खास बात यह है कि उनकी फीस नाममात्र की है—कोई 10 रुपये देता है तो कोई 100 रुपये, और कई मरीज बिना पैसे दिए भी लौट जाते हैं। डॉ. सिंह कभी किसी से फीस की मांग नहीं करते, न ही मरीज की आर्थिक स्थिति पूछते हैं। उनके ...
छत्तीसगढ़ फैक्ट्री विस्फोट में गया के छह मजदूरों की मौत, गोतिबंध गांव में पसरा मातम हादसे से बाल-बाल बचे राजेश बोले— अगर लौटता नहीं, तो मैं भी उनमें शामिल होता
Bihar, State

छत्तीसगढ़ फैक्ट्री विस्फोट में गया के छह मजदूरों की मौत, गोतिबंध गांव में पसरा मातम हादसे से बाल-बाल बचे राजेश बोले— अगर लौटता नहीं, तो मैं भी उनमें शामिल होता

गया। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में स्थित एक स्पंज आयरन प्लांट में कोयला भट्टी फटने से बिहार के गया जिले के छह मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के पैतृक गांव डुमरिया प्रखंड के गोतिबंध गांव में कोहराम मच गया है। हर घर में शोक की लहर है और गांव गमगीन माहौल में डूबा हुआ है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हुए इस भीषण विस्फोट में रोजी-रोटी की तलाश में छत्तीसगढ़ गए छह मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। सभी मजदूर करीब 15 दिन पहले ही काम के सिलसिले में छत्तीसगढ़ गए थे। हादसे में जान गंवाने वालों में श्रवण कुमार (22), जितेंद्र भुइयां (37), बद्री भुइयां (42), विनय भुइयां (40) तथा सुंदर भुइयां (40) और उनके पुत्र राजदेव भारती (22) शामिल हैं। पिता-पुत्र की एक साथ मौत से गांव में शोक और भी गहरा हो ग...
Live: नीतीश कुमार पहुंचे मुजफ्फरपुर, ‘समृद्धि यात्रा’ में सौगात के तौर पर 851 करोड़ की 172 योजनाओं का उद्घाटन
Bihar, State

Live: नीतीश कुमार पहुंचे मुजफ्फरपुर, ‘समृद्धि यात्रा’ में सौगात के तौर पर 851 करोड़ की 172 योजनाओं का उद्घाटन

  मुजफ्फरपुर: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'समृद्धि यात्रा' के तहत आज शुक्रवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जिले में चल रही विकासात्मक परियोजनाओं का निरीक्षण किया और कई योजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया।   मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, मंत्री विजय चौधरी, मंत्री रामकृपाल यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मुजफ्फरपुर में सीएम ने कुल 851 करोड़ रुपए की लागत से 172 योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, जलापूर्ति और ग्रामीण विकास से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।   इस अवसर पर सीएम नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों के द्वारा स्थापित विभिन्न स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह योजनाएं जिले के विकास और आम जनता की भलाई के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी।   मुजफ्फरपुर की धर...
मुजफ्फरपुर क्यों नहीं बन पाया बिहार का ‘मैनचेस्टर’? नीतीश कुमार के दौरे से पहले जानिए वजह
Bihar, State

मुजफ्फरपुर क्यों नहीं बन पाया बिहार का ‘मैनचेस्टर’? नीतीश कुमार के दौरे से पहले जानिए वजह

  मुजफ्फरपुर: बिहार का मुजफ्फरपुर कभी सूती वस्त्र उद्योग के केंद्र के रूप में ‘मैनचेस्टर’ बनने का सपना देख रहा था। यह सपना समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने 1978-80 के दौरान रखा था। तब कहा गया था कि मुजफ्फरपुर जल्द ही सूती वस्त्र उद्योग के लिए अपनी पहचान बना लेगा।   बेला औद्योगिक क्षेत्र की शुरुआत और गिरावट बेला औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना मुजफ्फरपुर से सांसद रहे स्व. जॉर्ज फर्नांडिस ने की थी। प्रारंभिक 8 वर्षों में लगभग 35 औद्योगिक इकाइयाँ चलीं। लेकिन 1990 के बाद ‘जंगल राज’ और सरकार की उपेक्षा ने क्षेत्र की कमर तोड़ दी। बुनियादी संसाधनों की कमी, बढ़ता अपराध और अपर्याप्त प्रशासनिक समर्थन के कारण बेला औद्योगिक क्षेत्र धीरे-धीरे मृतप्राय हो गया। 2010 के बाद स्थिति में आंशिक सुधार हुआ और 2020 से क्षेत्र में बदलाव की झलक दिखने लगी।   टेक्सटाइल...