
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले को बेहद निराशाजनक और देशहित के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने अमेरिका को फिर से महान बनाने के उनके एजेंडे को सही ढंग से नहीं समझा।
ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यह शर्म की बात है कि कुछ जज देशहित में सही फैसले लेने की हिम्मत नहीं रखते और विदेशी हितों से प्रभावित हैं।” हालांकि उन्होंने जस्टिस थॉमस, अलिटो और कैवनॉ की तारीफ की, जिन्होंने टैरिफ के पक्ष में राय दी।
नए टैरिफ की तैयारी
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनके पास टैरिफ लगाने के दूसरे तरीके मौजूद हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश होने वालों की खुशी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। उन्होंने कहा, “हम नए सिरे से 10% ग्लोबल टैरिफ लगाएंगे। पुराने टैरिफ पूरी तरह लागू रहेंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि अब वह सेक्शन 122 के तहत 10% टैरिफ लगाने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर तुरंत साइन करेंगे। यह सेक्शन 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत आता है। ट्रंप ने कहा कि कांग्रेस से किसी और कार्रवाई की जरूरत नहीं है, क्योंकि सेक्शन 232 और सेक्शन 301 के तहत यह अधिकार पहले ही मौजूद हैं।
रिफंड के सवाल पर ट्रंप का जवाब
ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका ने जो अरबों डॉलर टैरिफ के रूप में इकट्ठा किए हैं, क्या उन्हें लौटाना होगा। इस पर उन्होंने कहा, “इस पर अभी कोई बात नहीं हुई। मामला अगले कुछ सालों तक कोर्ट में चलेगा, और हम पांच साल तक न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप द्वारा बीते साल लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का गलत इस्तेमाल बताते हुए रद्द कर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं बल्कि अमेरिकी संसद को है।
