Thursday, February 19

दिल्ली में सड़क निर्माण टेंडर पर उठे सवाल, आधे से भी कम कीमत पर मिला काम, एमसीडी पर धांधली के आरोप

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सड़क निर्माण से जुड़े एक टेंडर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एमसीडी (नगर निगम दिल्ली) के शाहदरा नॉर्थ जोन के प्रोजेक्ट-1 डिविजन द्वारा करावल नगर विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए जारी किए गए टेंडर में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

This slideshow requires JavaScript.

जानकारी के अनुसार, एमसीडी ने जिस सड़क निर्माण कार्य के लिए 2 करोड़ 25 लाख 76 हजार 446 रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया था, उसी कार्य को एक कंपनी ने 55 प्रतिशत कम कीमत पर करने की पेशकश की और टेंडर हासिल भी कर लिया। अब सवाल उठ रहा है कि इतनी कम राशि में सड़क का निर्माण आखिर कैसे संभव होगा और अगर सड़क बन भी गई तो उसकी गुणवत्ता कितनी टिकाऊ होगी।

शहीद दिनेश चंद्र शर्मा मार्ग और करावल नगर पुश्ता रोड का मामला

एमसीडी शाहदरा नॉर्थ जोन के तहत आने वाले शहीद दिनेश चंद्र शर्मा मार्ग और करावल नगर पुश्ता रोड के निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। विभागीय अनुमान के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में करीब 2.25 करोड़ रुपये का खर्च आना था।

लेकिन टेंडर खुलने के बाद सुरेश कुमार गोयल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी की बोली सबसे कम (एल-वन) निकली। कंपनी ने यह काम मात्र 1 करोड़ 1 लाख 41 हजार 339 रुपये में पूरा करने की बात कही।

कम कीमत में सड़क निर्माण पर उठी गंभीर चिंता

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में सामग्री, मजदूरी, मशीनरी और अन्य खर्चों को देखते हुए इतनी कम कीमत पर काम कराना संदेह पैदा करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर ठेकेदार आधी राशि में सड़क बनाएगा तो कहीं न कहीं गुणवत्ता से समझौता किया जा सकता है, जिससे सड़क कुछ ही समय में टूटने लगेगी।

अन्य ठेकेदारों ने भी दी थी कम कीमत

सूत्रों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में अन्य ठेकेदार भी शामिल थे।

  • राजन बिल्डर्स ने 46 प्रतिशत कम कीमत पर काम करने की इच्छा जताई थी।

  • वहीं बाल किशन गुप्ता ने 40 प्रतिशत कम रेट पर बोली लगाई थी।

लेकिन 55 प्रतिशत कम बोली लगाकर सुरेश कुमार गोयल बिल्डकॉन को टेंडर मिल गया।

टेंडर प्रक्रिया में धांधली का आरोप

इस टेंडर को लेकर एमसीडी कमिश्नर को शिकायत भी भेजी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया शुरू करने से लेकर टेंडर अलॉट करने तक पूरे मामले में भारी अनियमितता और धांधली हुई है।

सूत्रों का दावा है कि टेंडर से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद एक अन्य कंपनी को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, ताकि पसंदीदा ठेकेदारों को टेंडर दिया जा सके।

अब बड़ा सवाल- सड़क कितने दिन टिकेगी?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एमसीडी इंजीनियरों ने सोच-समझकर सड़क निर्माण के लिए अनुमानित बजट तैयार किया था, तो फिर कोई ठेकेदार 55 प्रतिशत कम कीमत में सड़क कैसे बना सकता है?
और यदि सड़क बन भी गई तो वह कितने दिनों तक टिक पाएगी, यह भी एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

फिलहाल, इस पूरे मामले के सामने आने के बाद दिल्ली में टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।

Leave a Reply