
नई दिल्ली: कोरोना काल के बाद रियल एस्टेट बाजार में ग्राहक लौट आए हैं, लेकिन इस समय नए प्रोजेक्ट मुख्य रूप से प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट के हैं। अफोर्डेबल हाउसिंग के क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट न के बराबर लॉन्च हो रहे हैं।
क्यों बढ़ रहा लग्जरी मकानों का रुझान
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अमीर खरीदार अपनी पसंद और बेहतर लाइफस्टाइल वाले मकान खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।
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प्रीमियम मकानों की मांग पर बैंक लोन और ब्याज दरों का प्रभाव कम होता है, इसलिए खरीदार जल्दी निर्णय ले लेते हैं।
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डेवलपर्स कम मकानों की संख्या बेचकर नहीं बल्कि कीमतों से कमाई बढ़ा रहे हैं।
गुलशन होम्स के प्रमोटर और क्रेडाई (नेशनल) के प्रवक्ता दीपक कपूर के अनुसार, लोग बजट में रहते हुए भी बेहतर जीवनशैली वाला मकान चाहते हैं। यही वजह है कि उपर-मिड सेगमेंट डेवलपर्स के लिए सबसे मुफीद बन गया है।
अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट क्यों नहीं आ रहे
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महानगर, शहर या कस्बों में जमीन के दाम काफी बढ़ गए हैं।
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कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की कीमतों में पिछले तीन साल में लगभग 60% बढ़ोतरी हुई है।
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सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग की नीति तो बनाई, लेकिन निर्माण का कार्य निजी डेवलपर्स पर छोड़ दिया गया।
दीपक कपूर का कहना है कि यदि सरकार रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराए और अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा को अपडेट करे, तो इस सेगमेंट में हलचल दिखाई दे सकती है।
अफोर्डेबल हाउस की मांग बनी रहेगी
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किराया लगातार बढ़ रहा है, इसलिए सस्ते और मिड-सेगमेंट मकानों की मांग बनी रहेगी।
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मिड-सेगमेंट खरीदार बड़े मकान खरीदने में फिलहाल सावधान हैं, लेकिन जब वे निर्णय लेते हैं तो तेजी से खरीदारी करते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि तब तक रियल एस्टेट की सच्ची ग्रोथ केवल तभी मानी जाएगी जब आम खरीदार भी बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदने सामने आएंगे।
