
अहमदाबाद, 16 फरवरी 2026: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने एक इंटरव्यू में राजनीति के ऐतिहासिक पल और अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण पर खुलकर बात की। 85 वर्षीय वाघेला ने कहा कि अगर वे और उनके समर्थक बीजेपी में होते, तो शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रास्ता आगे नहीं बढ़ता।
राजनीति में सेल्फ-रिस्पेक्ट हमेशा प्राथमिकता
वाघेला ने कहा, “हम सेल्फ-रिस्पेक्ट वाले हैं। हम अपने लिए राजनीति में किसी समझौते पर नहीं उतरते। हम राजनीति में कुछ हासिल करने के लिए नहीं आए, बल्कि आम जनता के लिए आए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति में उद्देश्य पद या सत्ता नहीं था।
उन्होंने आगे कहा कि वे राजपूत और क्षत्रिय होने के कारण गलत तरीके से किसी समझौते पर नहीं जा सकते। वाघेला का मानना है कि चाहे पृथ्वी का स्वर्ग भी मिले, लेकिन आत्म-सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री बनने की कहानी
वाघेला ने बताया कि 1995 में उन्होंने बीजेपी से बगावत कर दी थी और 47 विधायकों के समर्थन से कांग्रेस के सहयोग से गुजरात के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि सरकार बनाना उनका उद्देश्य नहीं था, बल्कि विधायकों के दबाव और जनता की उम्मीदों को देखते हुए उन्होंने यह जिम्मेदारी ली।
पीएम मोदी से वक्तिगत रिश्ते
शंकर सिंह वाघेला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत रिश्ते भी मजबूत रहे हैं। दिसंबर 2022 में पीएम मोदी की मां हीरा बा के निधन पर अंतिम विदाई में वाघेला की उपस्थिति इस रिश्ते की मिसाल थी। वाघेला गुजरात की राजनीति में अपने समय में “बापू” के नाम से भी जाने जाते हैं।
वाघेला ने यह भी कहा कि गुजरात मॉडल और शराबबंदी जैसी नीतियों की आलोचना उनके दृष्टिकोण का हिस्सा रही है, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों में वे हमेशा सम्मानपूर्ण रहे हैं।
