
नई दिल्ली। नए लेबर कोड (Labour Codes) के लागू होने के बाद आम कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनके वेतन में बढ़ोतरी होगी। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन थोड़े ही बढ़ सकता है, जबकि आईटी और अन्य स्पेशलाइज्ड सेक्टर में इसका असर अलग हो सकता है।
कंपनियों का बढ़ा खर्च
नवंबर 2025 में नए लेबर कोड लागू होने के बाद ग्रेच्युटी, ओवरटाइम, बोनस और लीव एनकैशमेंट जैसे फायदों का खर्च बढ़ गया है। कंपनियों को अब इन सभी लाभों का हिसाब नए वेतन की परिभाषा के अनुसार करना होगा। इस वजह से कुछ सेक्टरों, खासकर आईटी कंपनियों में पिछले तिमाही के मुनाफे पर असर पड़ा है।
वेतन वृद्धि का आधार
विशेषज्ञों का कहना है कि वेतन वृद्धि मुख्य रूप से कर्मचारी की मांग, कौशल और प्रोडक्टिविटी पर निर्भर करती है, नियमों के पालन से जुड़े खर्च पर नहीं। कॉम्पिटिटिव मार्केट में अगर कंपनियां वेतन कम करती हैं, तो कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का खतरा बढ़ जाता है, जो कंपनियों के लिए महंगा साबित हो सकता है।
इस साल अनुमानित बढ़ोतरी
Aon के टैलेंट सॉल्यूशंस-इंडिया के एसोसिएट पार्टनर अमित ओटवानी के अनुसार, कंपनियां नए लेबर कोड के असर को पूरा करने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रही हैं। कुछ कंपनियां खर्च के लिए अलग बजट बना रही हैं, जबकि कुछ इसे कुल सैलरी पूल में एडजस्ट कर रही हैं। Aon ने 2026 में लगभग 9% की वेतन वृद्धि का अनुमान लगाया है।
हाई परफॉर्मर्स और स्पेशलाइज्ड स्किल्स को फायदा
एक्सिस बैंक की एचआर हेड राजकमल वेम्पटी का कहना है कि सैलरी वृद्धि का हल्का कम होना व्यापक नहीं बल्कि चुनिंदा होगा। हाई परफॉर्मर्स और बिज़नेस-क्रिटिकल रोल्स वाले कर्मचारियों को इसका पूरा लाभ मिलेगा।
बदलाव में लगेगा समय
अलकेम लेबोरेटरीज के प्रेसिडेंट और ग्लोबल एचआर हेड राजर्षि गांगुली का कहना है कि कंपनियां नए लेबर कोड की डिटेल्स का विश्लेषण कर कंपनीसेंशन स्ट्रक्चर की समीक्षा करेंगी और जरूरत पड़ने पर इसे कैलिब्रेट करेंगी। इस बदलाव के स्थिर होने में लगभग 2-3 महीने लग सकते हैं
