
पटना। बिहार विधानसभा में महिला कबड्डी वर्ल्ड कप को लेकर सियासी घमासान मच गया। भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद अधिकारियों ने कैबिनेट को गुमराह कर प्रस्ताव मंजूर कराया और MOU पर हस्ताक्षर कर दिए।
विधायक का आरोप
भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने सदन में कहा कि मामला 21 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और 4 फरवरी को कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। इसके बावजूद, कैबिनेट के एजेंडा नंबर 47 के तहत इसे स्वीकृति दी गई और 12 अप्रैल को MOU पर आनन-फानन में हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने तथ्यों को छिपाया और लापरवाही बरती।
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का जवाब
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित भारतीय फेडरेशन पर स्टे ऑर्डर दिया था और उनके वित्तीय मामले गंभीर थे। सरकार किसी विवादित फेडरेशन के साथ अपना नाम नहीं जोड़ना चाहती थी, इसलिए MOU साइन करने के बाद उसे रद्द कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मामला गंभीर था, इसलिए अन्य राज्य इस आयोजन की अनुमति नहीं दे रहे थे।
कार्रवाई की मांग
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि जवाब घुमाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि जब सॉलिसिटर जनरल मामले में मौजूद थे और फरवरी में आदेश आ गया था, तो अप्रैल में MOU क्यों साइन हुआ। उन्होंने सीधे तौर पर उन अधिकारियों को चिन्हित किया और उन पर कार्रवाई की मांग की। स्पीकर के दखल के बाद मामला शांत हुआ और सदन में आश्वासन दिया गया।
