Tuesday, February 3

जेएनयू प्रशासन का सख्त एक्शन: 5 पीएचडी छात्रों को निलंबित, कैंपस में प्रवेश पर भी रोक

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने पांच पीएचडी छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया है। इनमें जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के चार पदाधिकारी शामिल हैं। छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने 21 नवंबर, 2025 को डॉ. बी.आर. आंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में प्रवेश द्वार पर लगे ‘चेहरे की पहचान तकनीक’ (FRT) उपकरण में तोड़फोड़ की

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निलंबित छात्रों की सूची और जुर्माना
निलंबन पत्र के अनुसार, किझाकूट गोपिका बाबू, अदिति मिश्रा, सुनील यादव, दानिश अली और नीतीश कुमार को तत्काल प्रभाव से पूरे कैंपस में प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही, उन पर 20,000-20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। छात्र संघ के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल 19 अन्य छात्रों पर भी 19-19 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

छात्र संगठनों का विरोध
जेएनयू के तमाम छात्र संगठनों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है और इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि छात्रों को 15 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जांच में उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।

बड़े आंदोलन की तैयारी के समय कार्रवाई
यह कार्रवाई उस समय की गई जब यूनियन UGC की प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के स्थगन के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा था। इसके तहत 6 फरवरी को मशाल जुलूस और 7 फरवरी को छात्र संसद प्रस्तावित थी। इसे लेकर जेएनयूएसयू की अगुवाई में रात को सभी छात्र संगठनों की बैठक भी रखी गई थी।

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