
माले/वॉशिंगटन, 2 फरवरी: हिंद महासागर स्थित चागोस द्वीपसमूह को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवाद गहराता नजर आ रहा है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने संकेत दिया है कि यदि चागोस द्वीपसमूह मालदीव को सौंप दिया जाता है, तो अमेरिका डिएगो गार्सिया स्थित अपने रणनीतिक नौसैनिक अड्डे का उपयोग जारी रख सकता है। उनके इस बयान ने मॉरीशस और ब्रिटेन से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।
चागोस द्वीपसमूह लगभग 60 द्वीपों का समूह है, जो मालदीव से करीब 500 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका सबसे बड़ा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण द्वीप डिएगो गार्सिया है, जहां अमेरिका का प्रमुख सैन्य अड्डा स्थित है। वर्तमान में इस क्षेत्र का प्रशासनिक नियंत्रण ब्रिटेन के पास है, हालांकि 2024 में ब्रिटेन ने मॉरीशस की संप्रभुता को स्वीकार करने का समझौता किया था।
मुइज्जू का प्रस्ताव क्या है?
अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक को दिए साक्षात्कार में राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि उनकी सरकार ऐसी व्यवस्था पर विचार को तैयार है, जिसमें चागोस पर मालदीव का नियंत्रण होने की स्थिति में भी अमेरिका को डिएगो गार्सिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस व्यवस्था को वैधानिक रूप देने के लिए संसद से मंजूरी ली जा सकती है, जहां उनकी पार्टी का बहुमत है।
मॉरीशस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह चागोस द्वीपसमूह पर अपने संप्रभु अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। मॉरीशस का कहना है कि वह सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य उपयोग की व्यवस्था जारी रखने के लिए तैयार है।
मालदीव का ऐतिहासिक दावा
राष्ट्रपति मुइज्जू ने चागोस पर मालदीव के दावे को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक आधारों पर सही ठहराया। उन्होंने कहा कि द्वीपसमूह मालदीव की राजधानी माले से अपेक्षाकृत निकट है, जबकि मॉरीशस उससे काफी दूर स्थित है। मुइज्जू के अनुसार, चागोस में मिली प्राचीन कब्रों और अभिलेखों में दिवेही भाषा के प्रमाण मालदीव से पुराने संबंध दर्शाते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 16वीं सदी के दस्तावेजों में मालदीव के शासकों की संप्रभुता का उल्लेख मिलता है, जबकि मॉरीशस बाद में यूरोपीय उपनिवेशवाद के दौरान बसा।
रणनीतिक महत्व
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा माना जाता है। यह क्षेत्र समुद्री सुरक्षा, निगरानी और सामरिक अभियानों के लिहाज से अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि मालदीव का प्रस्ताव क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।
फिलहाल इस मुद्दे पर ब्रिटेन, मॉरीशस और अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।