Friday, May 15

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एके-47 और प्यार की कहानी: नक्सली कमांडर मादवी हिडमा ढेर, पत्नी राजे भी मारी गई

रायपुर: छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित इलाकों में नक्सली कमांडर मादवी हिडमा को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। इसी मुठभेड़ में उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का भी मारी गई। हिडमा माओवादियों की खूंखार इकाई का नेतृत्व करता था और उसे जंगल में गुरिल्ला युद्ध में महारत हासिल थी।

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जानकारी के अनुसार, मादवी हिडमा को सिर्फ एके-47 और अपनी पत्नी राजे से प्यार था। राजे भी आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करने में माहिर थी और हमेशा हिडमा के साथ जंगल में रहती थी।

एके-47 ही था पसंदीदा हथियार

नक्सलियों के पास आधुनिक हथियारों की भरमार है, लेकिन हिडमा हमेशा एके-47 ही रखता और इसी से कई नक्सली घटनाओं को अंजाम देता रहा।

फोर-लेयर सुरक्षा घेरा

हिडमा जंगल में चार-स्तरीय सुरक्षा घेरे में रहता था, जिसकी वजह से सुरक्षाबलों की पहुंच उससे वर्षों तक नहीं हो पाई। वह हर मुठभेड़ से पहले ही सुरक्षित निकल जाता था।

राजे से हुआ प्यार

हिडमा और राजे की मुलाकात जंगल में हुई थी। हथियार चलाते हुए दोनों के बीच प्यार हुआ और बाद में उन्होंने शादी कर ली। मुठभेड़ के दौरान दोनों उसी कमरे में थे जहां सो रहे थे। दो घंटे की मुठभेड़ में दोनों का काम तमाम हो गया। मुठभेड़ के पास दो एके-47 भी बरामद हुए हैं।

सुरक्षा घेरा कमजोर

पुलिस के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में तेज हुए नक्सल-विरोधी अभियानों ने हिडमा के सुरक्षा घेरे को कमजोर कर दिया, जिससे वह छत्तीसगढ़-तेलंगाना और छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश सीमा पर स्थित जंगलों में शरण लेने के लिए मजबूर हो गया।

शामिल रहा कई बड़े हमलों में

हिडमा ने 2013 में बस्तर के दरभा क्षेत्र में हुए झीरम घाटी हमले सहित कई बड़े हमलों में भाग लिया। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल और विद्याचरण शुक्ल मारे गए थे। 2017 में हुए बुरकापाल हमले में भी वह आरोपी था, जिसमें सीआरपीएफ के 24 जवान शहीद हुए थे। उसकी पत्नी राजे भी लगभग हर बड़े माओवादी हमले में सक्रिय रही।

वीर छवि और माओवादी संगठन पर बड़ा असर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हिडमा ने अपने कार्यकर्ताओं के बीच एक वीर छवि बना रखी थी। उसका खात्मा बस्तर क्षेत्र से माओवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस वर्ष माओवादियों की केंद्रीय समिति के नौ सदस्य मारे गए हैं। अब संगठन में केवल आठ शीर्ष माओवादी कार्यकर्ता बचे हैं।

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