
नई दिल्ली: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार एक ओर इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर गोपनीय बता रही है, जबकि दूसरी ओर इसमें निजी कंपनियों को शामिल करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने इसे विरोधाभासी करार देते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
गैलेथिया बे प्रोजेक्ट पर आपत्ति
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार गैलेथिया बे इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित करना चाहती है। यह टर्मिनल ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है।
पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार को इस परियोजना के संभावित विनाशकारी पर्यावरणीय प्रभाव की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद इसे जबरन आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर पर्यावरणीय और कानूनी चिंताएं जताई जा चुकी हैं और इस संबंध में कलकत्ता हाई कोर्ट तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिकाएं लंबित हैं।
निजी कंपनी को लेकर उठे सवाल
कांग्रेस का दावा है कि बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा हाल ही में पेश किए गए प्रस्ताव से यह साफ हो गया है कि सरकार इस परियोजना को PPP मोड में विकसित करना चाहती है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इसके पीछे एक बड़े निजी समूह को लाभ पहुंचाने की मंशा है, जो पहले से ही देश में कई बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करता है।
उन्होंने आरोप लगाया, “यह सब कुछ प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से हो रहा है।”
राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब सरकार इस परियोजना का विवरण साझा करने से यह कहकर बचती है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है, तो फिर उसी परियोजना में निजी कंपनियों को शामिल करना कैसे उचित ठहराया जा सकता है। पार्टी का आरोप है कि सरकार की पारदर्शिता केवल राजनीतिक सुविधा तक सीमित रह गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस नेता सोनिया गांधी भी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर आपत्ति जता चुकी हैं। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं और यह परियोजना देश की भविष्य की रणनीतिक और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है।