
नई दिल्ली: जेईई मेन परीक्षा का परिणाम आने के बाद भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन की दौड़ शुरू हो जाएगी। ऐसे में जेईई मेन का कटऑफ समझना बेहद जरूरी है। कटऑफ स्कोर तय करेगा कि कौन उम्मीदवार JEE Advanced 2026 के लिए योग्य है और कौन NITs, IIITs और अन्य सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों में एडमिशन के लिए पात्र है।
कटऑफ क्यों जरूरी है?
जेईई मेन कटऑफ एक क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल के आधार पर तय किया जाता है और यह हर कैटेगरी के लिए अलग होता है। कटऑफ निर्धारण में कई फैक्टर्स शामिल होते हैं:
परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों की संख्या
प्रश्न पत्र का कठिनाई स्तर
शिफ्ट-वार प्रदर्शन में समानता
संस्थानों में सीटों की उपलब्धता
पिछले 5 साल का JEE Main कटऑफ ट्रेंड (स्कोर, कैटेगरी वाइज)
| कैटेगरी | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 |
| ——— | —– | —– | —– | —– | —– |
| जनरल (UR) | 87.90 | 88.41 | 90.77 | 93.23 | 93.10 |
| OBC-NCL | 68.02 | 67.01 | 73.61 | 79.68 | 79.67 |
| SC | 46.86 | 43.07 | 51.98 | 60.10 | 60.90 |
| ST | 34.66 | 26.75 | 37.23 | 46.70 | 46.70 |
कैंडिडेट्स के लिए सुझाव:
कटऑफ से केवल संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
हमेशा NTA द्वारा जारी ऑफिशियल कटऑफ पर भरोसा करें।
अपने रॉ मार्क्स के बजाय अपेक्षित पर्सेंटाइल के आधार पर तैयारी जारी रखें।
जेईई मेन 2026 सेशन-1 की परीक्षाएं 29 जनवरी 2026 तक जारी रहेंगी।
परिणाम आने से पहले NTA प्रोविजनल आंसर की जारी करेगा, जिससे कैंडिडेट्स अपने स्कोर का अनुमान लगा सकते हैं।
इस ट्रेंड से उम्मीदवारों को अपनी तैयारी, स्कोर टारगेट और एडमिशन की संभावनाओं को समझने में मदद मिलेगी।