
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने चोरी के मोबाइल फोन का IMEI नंबर बदलकर बेचने के आरोपी मुदस्सिर काजमी की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जांच लंबित होने और हिरासत में पूछताछ की जरूरत को देखते हुए, आरोपी को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं है।
अभियोजन और आरोप
पुलिस के अनुसार, काजमी ने अपने भाई और अन्य साथियों के साथ मिलकर चोरी के मोबाइल फोन का IMEI नंबर बदलकर उन्हें आगे बेचा। जांच के दौरान आरोपी की दुकान पर छापा मारा गया और चोरी के कई मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस ने बताया कि आरोपी द्वारा चलाए जा रहे मोबाइल फोन के व्यवसाय में चार करोड़ से ज्यादा का लेन-देन हुआ।
काजमी ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि उसे झूठे केस में फंसाया गया है। उसके वकील राजन चौधरी ने कहा कि उसका भाई मुजम्मिल ही मोबाइल फोन का कारोबार कर रहा था और आरोपी का इसमें कोई रोल नहीं था।
कोर्ट का रुख
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने 22 जनवरी को सुनवाई करते हुए कहा कि अगर संबंधित मोबाइल फोन चोरी के नहीं थे, तो कोई भी IMEI नंबर बदलने की कोशिश क्यों करेगा। कोर्ट ने वकील की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और गिरफ्तारी जरूरी है।
इस फैसले के बाद आरोपी की गिरफ्तारी होना निश्चित है। यह मामला चोरी और मोबाइल फोन के अवैध कारोबार में पुलिस की सख्ती और न्यायिक प्रक्रिया को दर्शाता है।