
मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के 100वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाई उद्धव ठाकरे के साथ मंच साझा किया। इस दौरान राज ठाकरे ने हास्य और तीखे राजनीतिक कटाक्षों का उपयोग कर महाराष्ट्र की बदलती राजनीति और चुनावी हालात पर तगड़ा व्यंग्य किया।
राज ठाकरे ने अपने भाषण में कहा, “मेरे डॉक्टर ने भी पार्टी बदल ली।” यह कथन उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों पर मजाक के रूप में कहा। कार्यक्रम में शिवसेना यूबीटी के तमाम दिग्गज नेता और राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी मौजूद रहे। यह पहला मौका था जब बीएमसी चुनाव परिणामों के बाद दोनों भाई सार्वजनिक मंच पर आए। बीएमसी चुनाव में उद्धव ठाकरे की पार्टी को 89 और मनसे को 6 सीटें मिली हैं।
राज ठाकरे के भाषण की 10 महत्वपूर्ण बातें:
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राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे का सम्मान करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की और अपने खास अंदाज में हल्के-फुल्के किस्से साझा किए।
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उन्होंने बताया कि चुनाव के पहले उद्धव ठाकरे बीमार थे, लेकिन चुनाव के बाद स्थिति उलट गई।
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राज ठाकरे ने डॉक्टर से जुड़ी मजाकिया घटना सुनाई और कहा कि उनके डॉक्टर ने भी पाला बदल लिया।
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उन्होंने बाल ठाकरे के योगदान को याद करते हुए कहा कि मराठी भाषा और मराठी लोगों के लिए जो लड़ाई उन्होंने लड़ी, वह आज भी जलती रहेगी।
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बाल ठाकरे ने आम कार्यकर्ता को सत्ता में लाने का संतोष अनुभव किया, जबकि आज के शासक केवल प्रभाव के लिए जीते हैं।
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राज ठाकरे ने कहा कि किसी भी निर्णय में निजी लाभ की राजनीति नहीं करेंगे।
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उन्होंने बाल ठाकरे के हिंदुत्व और राजनीतिक दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए वर्तमान स्थिति की तुलना की और कहा कि आज महाराष्ट्र और देश के राजनीतिक हालात “गुलामों का बाजार” बन गए हैं।
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राज ठाकरे ने अपने मराठी प्रेम और भावनाओं को साझा किया और कहा कि बालासाहेब और मराठी लोगों के प्रति उनका सम्मान कम नहीं होगा।
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उन्होंने कहा कि बाल ठाकरे ने साबित किया कि हिंदू भी पॉलिटिकल ताकत बन सकता है।
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अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि आज बाल ठाकरे न होते तो वे वर्तमान राजनीतिक हालात देखकर परेशान होते।
दोनों भाइयों की केमिस्ट्री
बाल ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत पर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच शानदार केमिस्ट्री देखी गई। राज ने उद्धव को सम्मानित किया और शॉल ओढ़ाया। दोनों भाईयों ने महाराष्ट्र में लंबे समय तक साथ रहने और चुनाव लडऩे का ऐलान किया।
इस कार्यक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि राज ठाकरे ने राजनीतिक व्यंग्य और भावनात्मक संदेशों का अद्भुत मिश्रण पेश किया, जबकि दोनों भाइयों की सार्वजनिक उपस्थिति ने बीएमसी चुनावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर में नया आयाम जोड़ दिया।