Wednesday, January 21

सारण को क्यों कहते हैं छपरा? जानिए प्राचीन इतिहास और सम्राट अशोक से कनेक्शन

 

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छपरा (सारण): बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी महत्वाकांक्षी समृद्धि यात्रा के तहत बुधवार को सारण जिले पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने जिले में विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया और सारण जिले के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

 

सारण जिले को आमतौर पर इसके जिला मुख्यालय छपरा के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि जिले का आधिकारिक नाम सारण ही है। ब्रिटिश काल में छपरा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र था और यहां सन 1864 में नगर पालिका की स्थापना हुई। 18वीं सदी में यह क्षेत्र नदी आधारित व्यापार और प्रशासन का केंद्र बन गया था। डच, फ्रांसीसी और अंग्रेजों ने यहां सॉल्टपीटर रिफाइनरी भी स्थापित की थी।

 

सारण का इतिहास 4000 साल पुराना माना जाता है। यह क्षेत्र कोसल के प्राचीन साम्राज्य का हिस्सा था और मौर्य सम्राट अशोक के अधीन रहा। गंगा, गंडक और घाघरा नदियों से घिरा यह जिला भारत के सबसे प्राचीन मानव बसाहट स्थलों में से एक है। सारण जिले के पास स्थित चिरांद पुरातात्विक स्थल, छपरा से लगभग 11 किलोमीटर दूर, ईसा पूर्व 2000 यानी आज से लगभग 4000 साल पुराना माना जाता है। यह स्थल महाजनपद काल में कोसल साम्राज्य के अंग के रूप में जिले के प्राचीन इतिहास का गवाह है।

 

सारण में आठवीं सदी के ताम्रफलक भी मिले हैं, जिनमें महेन्द्रपाल देव के शासनकाल (सन 898) की पुष्टि होती है। बाबर के समय यह क्षेत्र मुगल शासन के अधीन आया और अकबर के शासनकाल में इसका विवरण आईन-ए-अकबरी में मिलता है। बक्सर के युद्ध (1765) के बाद इस इलाके के दीवानी अधिकार अंग्रेजों को प्राप्त हुए।

 

सारण के नामकरण को लेकर पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम के अनुसार, ‘सारण’ शब्द ‘शरण’ से उत्पन्न हुआ। माना जाता है कि मौर्य सम्राट अशोक के काल में यहां लगाए गए धम्म स्तंभ (अशोक स्तंभ) को ‘शरण’ कहा जाता था, जो बाद में सारण में बदल गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार, सारण का नाम ‘सरंगारण्य’ से लिया गया, जिसका अर्थ है ‘हिरणों का जंगल’, क्योंकि प्रागैतिहासिक काल में यहां हिरणों की बड़ी संख्या में उपस्थिति थी।

 

इस प्रकार सारण न केवल बिहार का ऐतिहासिक जिला है, बल्कि भारतीय प्राचीन इतिहास में इसका विशेष महत्व रहा है।

 

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