Tuesday, January 20

हिंद महासागर में अमेरिकी ‘परमाणु किला’ डिएगो गार्सिया पर घमासान ट्रंप ने UK को बताया ‘बड़ा बेवकूफ’, भारत की भूमिका से तय हुआ सौदा

वॉशिंगटन/नई दिल्ली।
हिंद महासागर में स्थित अमेरिका के सबसे अहम सैन्य अड्डों में से एक डिएगो गार्सिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बवाल मच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाने के ब्रिटेन के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए यूनाइटेड किंगडम को “बड़ा बेवकूफ” करार दिया है। ट्रंप का कहना है कि यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

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डिएगो गार्सिया को अमेरिका का ‘परमाणु किला’ माना जाता है, जहां से मिडिल ईस्ट से लेकर एशिया तक सैन्य अभियानों को अंजाम दिया जाता रहा है। यह द्वीप भारत के दक्षिणी तट से महज 1800 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ जाती है।

ट्रंप का हमला: चीन-रूस को मिलेगा फायदा

ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि
“हैरानी की बात है कि हमारा ‘शानदार’ नाटो सहयोगी ब्रिटेन, डिएगो गार्सिया जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने को मॉरीशस को सौंपने जा रहा है, वो भी बिना किसी ठोस वजह के। चीन और रूस ने इस कमजोरी को जरूर नोटिस किया होगा।”

उन्होंने इसे अमेरिका के लिए चेतावनी बताते हुए कहा कि यही कारण है कि ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों को हासिल करना अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

क्या है डिएगो गार्सिया?

डिएगो गार्सिया, हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है। यह द्वीप पूर्वी अफ्रीका के तट से लगभग 3200 किलोमीटर दूर है। यहां दशकों से अमेरिका और ब्रिटेन का साझा सैन्य बेस संचालित हो रहा है, जो पश्चिम एशिया, अफगानिस्तान और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी अभियानों की रीढ़ माना जाता है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार ने चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाने और डिएगो गार्सिया के सैन्य अड्डे को लीज पर बनाए रखने का समझौता किया है।

भारत की अहम भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। भारत ने 22 मई 2025 को हस्ताक्षरित चागोस संधि का खुलकर स्वागत किया था और लगातार मॉरीशस के दावे का समर्थन किया है। भारत इसे क्षेत्रीय अखंडता और उपनिवेशवाद से मुक्ति का मुद्दा मानता रहा है।

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच इस समझौते को सफल बनाने में महत्वपूर्ण मध्यस्थ भूमिका निभाई, ताकि

  • मॉरीशस को उसकी संप्रभुता वापस मिले
  • और डिएगो गार्सिया में अमेरिकी सैन्य अड्डा निर्बाध रूप से चलता रहे

ब्रिटेन ने इस द्वीप पर 99 वर्षों की लीज के तहत नियंत्रण बनाए रखने पर सहमति जताई है।

बढ़ती चीनी मौजूदगी से चिंता

अमेरिका में रिपब्लिकन सांसदों ने आशंका जताई है कि संप्रभुता परिवर्तन के बाद चीन हिंद महासागर में जासूसी गतिविधियां बढ़ा सकता है। ऐसे समय में ट्रंप का यह बयान आया है, जब चीन इस क्षेत्र में आर्थिक और सैन्य प्रभाव तेजी से बढ़ा रहा है।

निष्कर्ष

डिएगो गार्सिया केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि हिंद महासागर में शक्ति संतुलन का केंद्र है। ट्रंप के तीखे बयान, ब्रिटेन का फैसला और भारत की कूटनीतिक भूमिका—तीनों मिलकर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

 

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