Sunday, February 8

पटना हॉस्टल कांड: जहानाबाद की बेटी को इंसाफ दो! पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली कहानी, सवालों के घेरे में पुलिस और हॉस्टल प्रबंधन

 

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जहानाबाद/पटना। बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। अस्पताल में कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद छात्रा की मौत और फिर सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के शुरुआती दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि “यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता”—जिसके बाद यह मामला अब सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि इंसाफ की लड़ाई बन चुका है।

 

इसी बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर शुक्रवार को जहानाबाद पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की दिशा बदल गई है और अब निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश की गई और सच्चाई को सामने आने से रोकने का प्रयास हुआ।

 

 

 

तारीख दर तारीख समझिए पूरा मामला

 

5 जनवरी 2026:

शकूराबाद की रहने वाली छात्रा अपने घर से पटना स्थित हॉस्टल के लिए निकली। रात में उसने परिजनों को फोन कर बताया कि वह सुरक्षित हॉस्टल पहुंच गई है। उस दिन तक वह पूरी तरह स्वस्थ थी।

 

6 जनवरी 2026:

अगले ही दिन पिता को सूचना मिली कि उनकी बेटी हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली है। हॉस्टल के केयरटेकर ने बताया कि उसे एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया है। परिजन तुरंत पटना पहुंचे और हालत गंभीर देख छात्रा को बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह कोमा में चली गई।

 

9 जनवरी 2026:

चित्रगुप्त नगर थाना को मामले की सूचना मिली—हैरानी की बात यह रही कि एफआईआर हॉस्टल प्रबंधन ने नहीं, बल्कि छात्रा के पिता ने दर्ज कराई। एफआईआर में उन्होंने बेटी के साथ दुष्कर्म की आशंका जताई और शरीर पर चोट के निशानों का जिक्र किया।

 

11 जनवरी 2026:

पटना सिटी एएसपी अभिनव कुमार ने मीडिया को बताया कि जांच में यौन हिंसा के कोई सबूत नहीं मिले हैं और डॉक्टरों के अनुसार छात्रा ने नींद की गोलियों का अधिक सेवन किया था। इस बयान ने लोगों को चौंका दिया।

 

11–12 जनवरी 2026:

पुलिस के इस बयान के बाद आक्रोश फूट पड़ा। परिजनों और स्थानीय लोगों ने छात्रा के शव के साथ पटना के कारगिल चौक पर प्रदर्शन किया। दबाव बढ़ने पर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया गया।

 

13 जनवरी 2026:

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने भी मीडिया में कहा कि यौन हिंसा नहीं हुई है—जबकि उस समय तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई ही नहीं थी। परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रिपोर्ट का इंतजार किए बिना निष्कर्ष सुना दिया।

 

16 जनवरी 2026:

पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, जिसमें साफ लिखा गया—Sexual assault can not be ruled out। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट को अंतिम पुष्टि के लिए एम्स भेजा गया है।

 

 

 

हॉस्टल और पुलिस पर उठते गंभीर सवाल

 

  1. छात्रा अगर अपने कमरे में बेहोश थी, तो दरवाजा किसने और कब खोला?
  2. इतनी बड़ी घटना की सूचना पुलिस को पहले क्यों नहीं दी गई?
  3. एक दिन पहले पूरी तरह स्वस्थ छात्रा अगले दिन सीधे कोमा में कैसे पहुंच गई?
  4. पिता की एफआईआर में यौन हिंसा की आशंका के बावजूद पुलिस ने इसे दवा के ओवरडोज का मामला क्यों बताया?
  5. सबसे बड़ा सवाल—बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट आए पुलिस कैसे अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच गई?

 

 

 

इंसाफ की मांग तेज

 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह मामला अब और गंभीर हो गया है। परिवार, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की मांग है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों को कड़ी सजा मिले।

 

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