
ई-बुक के दौर के बावजूद प्रिंट की दुनिया में रुचि कायम; इतिहास, समाजशास्त्र और जीवन कौशल पर आधारित किताबें सबसे ज्यादा बिक रही हैं
नई दिल्ली: डिजिटल युग और ई-बुक के बढ़ते चलन के बावजूद छपी किताबों की मांग में कमी नहीं आई है। प्रकाशक अब नए पाठकों, खासकर Gen-Z पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए नए विषय और लेखकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इतिहास, समाजशास्त्र, जीवनी और करियर/मानसिक स्थिरता से जुड़ी किताबें आजकल सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।
राजकमल प्रकाशन के मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक माहेश्वरी का कहना है कि छपी किताबों का रुतबा आज भी बरकरार है और प्रिंट साहित्य कभी खत्म नहीं होगा। वहीं, वाणी प्रकाशन की CEO अदिति माहेश्वरी बताती हैं कि कोरोना काल में ई-बुक की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा था, लेकिन अब पाठक दोबारा प्रिंट किताबें खरीदने लगे हैं।
अशोक बताते हैं कि प्रिंट किताब भरोसेमंद होती है और पाठक आज भी खबर और सत्यापन के लिए अखबार या किताबों को प्राथमिकता देते हैं। अदिति का कहना है कि कहानी और कविता के साहित्य के मुकाबले आज लोग जीवन से जुड़े विषयों में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। आत्मकथा, जीवनी और संस्मरण की बिक्री बढ़ रही है, वहीं LGBTQ+ और सांस्कृतिक विषयों से जुड़ी किताबें भी लोकप्रिय हैं।
Gen-Z पाठकों के लिए नए लेखक और जीवन-संबंधी सामग्री आकर्षण का केंद्र बने हैं। करियर ग्रोथ, मेंटल स्टेबिलिटी और हिंदी में अनुवादित विदेशी उपन्यासों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
प्रकाशन समूह अब AI का प्रयोग भी कर रहे हैं। अशोक माहेश्वरी बताते हैं कि साहित्य में नए प्रयोग और AI तकनीक के इस्तेमाल से बिक्री बढ़ रही है, लेकिन मौलिक साहित्य को संरक्षित करना अब भी चुनौती बना हुआ है।
प्रकाशक मानते हैं कि डिजिटल युग में भी छपी किताबें पाठकों को जोड़ने और साहित्य की दुनिया में विश्वास बनाए रखने का सबसे मजबूत माध्यम हैं।