
देश की राजधानी दिल्ली में हर व्यक्ति के पास औसतन दो मोबाइल फोन हैं। फिर भी, लैंडलाइन कनेक्शन की संख्या लगातार बढ़ रही है। दिल्ली सरकार और इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में कुल टेलीफोन कनेक्शन 6 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं।
कनेक्शन का हाल
- 2025 में कुल टेलीफोन कनेक्शन: लगभग 08 करोड़
- मोबाइल (वायरलेस) कनेक्शन: करीब 61 करोड़
- लैंडलाइन (वायरलाइन) कनेक्शन: 1 लाख
दिल्ली में लैंडलाइन कनेक्शन में पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसका कारण यह माना जा रहा है कि घर या ऑफिस में स्थिर और भरोसेमंद कनेक्शन चाहने वाले लोग लैंडलाइन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
8 साल में लैंडलाइन और मोबाइल का ट्रेंड
- 2018 में लैंडलाइन: 31.9 लाख → 2025 में1 लाख
- मोबाइल: 2018 में42 करोड़ → 2025 में 5.61 करोड़
आंकड़े बताते हैं कि मोबाइल कनेक्शन में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जबकि लैंडलाइन कनेक्शन लगातार बढ़ रहे हैं। 2022 से 2025 तक लैंडलाइन की संख्या में करीब 8 लाख का इजाफा हुआ।
लैंडलाइन: भरोसेमंद विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार, लोग मोबाइल फोन के मुकाबले लैंडलाइन कनेक्शन को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं, खासकर उन जगहों पर जहां नेटवर्क स्थिर नहीं होता या हाई-स्पीड डेटा की आवश्यकता कम होती है।
भविष्य की संभावना
अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो दिल्ली में लैंडलाइन कनेक्शनों की संख्या 1 करोड़ तक पहुंच सकती है। टेलीकॉम सेक्टर में मोबाइल का दबदबा तो बना रहेगा, लेकिन लैंडलाइन की बढ़ती लोकप्रियता नए बदलाव का संकेत देती है।
NBT की राय:
दिल्ली में टेलीकॉम बाजार अब स्थिर हो चुका है। मोबाइल फोन का दबदबा होने के बावजूद, लैंडलाइन कनेक्शन में हो रही बढ़ोतरी यह दिखाती है कि लोग अब भी स्थिर और भरोसेमंद कनेक्शन को महत्व देते हैं।