
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए बातचीत कर रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस डील पर मुहर लगने की संभावना है।
इस डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 80 प्रतिशत विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादन और रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी।
डील के तहत, विमानों की सेवाक्षमता बढ़ाने के लिए भारत में मरम्मत, रखरखाव और एमआरओ सुविधाएँ स्थापित करने की योजना है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना से भारतीय कंपनियों को राफेल के पुर्जों के निर्माण और भविष्य में निर्यात आदेश मिलने की संभावना भी है।
हाल ही में, फ्रांस की एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी थेल्स ने राफेल में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक AESA रडार के पार्ट्स बनाने का ठेका एक भारतीय कंपनी को सौंपा है।
भारत ने नौसेना के लिए पहले ही 24 राफेल विमानों का अनुबंध फ्रांस के साथ किया है। अब वायुसेना के लिए 114 विमानों की औपचारिक मंजूरी रक्षा अधिग्रहण परिषद से मिलने के बाद कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, राफेल विमानों की उपयोग क्षमता लगभग 90 प्रतिशत है, जो अमेरिकी F-35 समेत कई देशों के विमानों से बेहतर है। इससे भारतीय वायुसेना की क्षमता और सामरिक ताकत दोनों में वृद्धि होगी।