
नई दिल्ली: पाकिस्तान और भारत के संबंध आज तनावपूर्ण हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब भारत ने पाकिस्तान के गवर्नर जनरल को अपने गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। यह ऐतिहासिक घटना 1955 की है।
उस समय पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे। भारत ने उन्हें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उनका प्रशासनिक और शैक्षणिक बैकग्राउंड भारत से जुड़ा हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी और ब्रिटिश प्रशासन में चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में कार्य किया। 1947 से पहले वे इंडियन रेलवे अकाउंट्स सर्विस में थे और हैदराबाद के निज़ाम के वित्तीय सलाहकार भी रहे। बंटवारे के बाद वे पाकिस्तान चले गए और वहां पहले फाइनेंस मिनिस्टर बने।
मलिक गुलाम मोहम्मद का कार्यकाल पाकिस्तान में संवैधानिक बदलावों और राजनीतिक घटनाओं से भरा रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री ख्वाजा नजीमुद्दीन की सरकार को 1953 में बर्खास्त किया और 1954 में पाकिस्तान की संविधान सभा को भंग कर दिया। इन कदमों में पाकिस्तान की मिलिट्री लीडरशिप का समर्थन भी था, जिसमें जनरल अयूब खान भी शामिल थे।
1955 का गणतंत्र दिवस समारोह भारत के इतिहास में कई मायनों में विशेष रहा। यह पहला वर्ष था जब समारोह राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर आयोजित किया गया, जो बाद में स्थायी स्थान बन गया। इसी वर्ष परेड का स्थायी फॉर्मेट तय हुआ, जिसमें सभी तीनों सशस्त्र बलों – आर्मी, नेवी और एयर फोर्स – ने हिस्सा लिया और इंडियन एयर फोर्स का फ्लाईपास्ट भी शामिल हुआ। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झांकियों की शुरुआत भी इसी वर्ष हुई, जिससे समारोह को एक नया आयाम मिला।
यह ऐतिहासिक तथ्य यह याद दिलाता है कि स्वतंत्र भारत ने अपने शुरुआती वर्षों में पड़ोसी देशों के साथ संवाद और सहयोग की भावना को महत्व दिया।